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Study: वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा, महासागरों के 56 फीसदी पानी का बदला रंग; बताया बदलाव का कारण

Thu, 13 Jul 2023 03:34 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यूके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, यूके Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 13 Jul 2023 03:34 PM IST
सार

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), अमेरिका और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने कहा कि महासागरों के बदलते रंग को इंसानी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों में महासागर का रंग समय के साथ हरा होता जा रहा है।
 

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Climate change has shifted colour of over half of world's oceans: Study
महासागरों के पानी का बदला रंग। - फोटो : social media

विस्तार

एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले दो दशक में महासागरों के 56 फीसदी से अधिक पानी का रंग बदल गया है, जो पृथ्वी की कुल भूमि विस्तार से भी बड़ा है। इसके पीछे की वजह मानव-जनित जलवायु परिवर्तन बताई जा रही है। 

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नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन
महासागरों के बदलते रंग को इंसानी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), अमेरिका और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने नेचर जर्नल में प्रकाशित पत्र में लिखा है।

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पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत
भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों में महासागर का रंग समय के साथ लगातार हरा होता जा रहा है, जो सतही महासागरों के भीतर पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का संकेत देता है।

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अध्ययन करने में लगेंगे 30 साल
समुद्र के पानी का हरा रंग फाइटोप्लांकटन में मौजूद हरे वर्णक क्लोरोफिल से आता है, जो ऊपरी महासागर में पाए जाने वाले रोगाणु हैं। इसलिए, वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन पर उनकी प्रतिक्रिया देखने के लिए फाइटोप्लांकटन की निगरानी करने के इच्छुक हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे पहले किए गए अध्ययन में कहा गया है कि क्लोरोफिल परिवर्तनों पर नजर रखने में 30 साल लगेंगे।

सभी सात महासागर पर नजर
यूके के नेशनल ओशनोग्राफी सेंटर साउथेम्प्टन के मुख्य लेखक बीबी कैल और उनकी टीम ने साल 2002 से 2022 तक सभी सात महासागर पर नजर रखी। उन्होंने शुरू में रंगों की प्राकृतिक विविधताओं का अध्ययन यह देखकर किया कि वे किसी दिए गए वर्ष में क्षेत्रीय रूप से कैसे बदलते हैं। बाद में दो दशकों में हुए बदलाव पर अध्ययन किया गया। 

ग्रीनहाउस-गैस मॉडल की ली मदद
रंगों के बदलते समीकरण में जलवायु परिवर्तन के योगदान को समझने के लिए, उन्होंने दो परिदृश्यों के तहत पृथ्वी के महासागरों का अनुकरण करने के लिए डटकीविक्ज के 2019 मॉडल का उपयोग किया। मॉडल का इस्तेमाल एक ग्रीनहाउस गैसों के साथ और दूसरा उनके बिना किया गया। ग्रीनहाउस-गैस मॉडल ने 20 वर्षों से कम समय में दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत सतही महासागरों के रंग में बदलाव की भविष्यवाणी की। 

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