China: क्या मतलब है कि अमेरिका को लेकर शी जिनपिंग के बदले अंदाज का?
अमेरिकी विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि शी का जो भाषण अब सार्वजनिक किया गया है, उसमें शीत युद्ध वाली शब्दावली मौजूद है। इसमें शी ने व्यापार, टेक्नोलॉजी, भू-राजनीतिक प्रभाव और यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की तरफ से अपनाए जा रहे आक्रामक रुख की सीधी आलोचना की है...
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह साफ संकेत दिया है कि अब वे अमेरिका के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में हैं। कूटनीति विशेषज्ञों के मुताबिक मंगलवार को जो बयान उन्होंने दिया, उसमें उनके बदले अंदाज की साफ झलक मिली। शी अब तक सीधे तौर पर अमेरिका का नाम लेकर उसकी आलोचना से बचते रहे थे। लेकिन अब उन्होंने यह रुख बदल लिया है।
शी ने आरोप लगाया कि अमेरिका चीन दबाने और उसके विकास को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। शी ने यह आरोप देश की सर्वोच्च राजनीतिक परामर्श संस्था की बैठक को संबोधित करते हुए लगाया। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने उनके भाषण को प्रकाशित किया है।
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की अंदरूनी बैठकों में पहले भी शी अमेरिका का नाम लेकर उसकी आलोचना करते रहे हैं। लेकिन चीनी मीडिया जब उन भाषणों को प्रकाशित करता था, तब अमेरिका विरोधी टिप्पणियों को हटा दिया जाता था। लेकिन इस बार शिन्हुआ ने उन हिस्सों को भी सार्वजनिक कर दिया है। अब सार्वजनिक भाषणों में शी “कुछ देश” कह कर संकेतों में अमेरिका को निशाना बनाते थे।
अमेरिकी विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि शी का जो भाषण अब सार्वजनिक किया गया है, उसमें शीत युद्ध वाली शब्दावली मौजूद है। इसमें शी ने व्यापार, टेक्नोलॉजी, भू-राजनीतिक प्रभाव और यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की तरफ से अपनाए जा रहे आक्रामक रुख की सीधी आलोचना की है।
इस भाषण से ठीक पहले (सोमवार को) अमेरिकी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने अमेरिका-चीन संबंध पर एक चर्चा आयोजित की थी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सलाहकार रह चुकीं कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेसिका चेन वीस ने इसमें कहा कि अब दोनों देशों के बीच अब तनाव घटाना बहुत मुश्किल हो गया है, हालांकि दोनों देशों के पास भी टकराव घटाने के मौके हैं। उन्होंने कहा कि जैसे को तैसा का नजरिया किसी के हित में नहीं है।
लेकिन समझा जाता है कि शी के ताजा भाषण के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ आ गया है। वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में फेलॉ शिर्ली मार्टी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा की शी अपनी सत्ता लगातार अधिक मजबूत करते जा रहे हैं। इस बीच मुमकिन है कि वे देश में बढ़ रही आर्थिक सहित अन्य समस्याओं का दोष किसी दूसरे पर डालने की कोशिश में हों। संभव है कि इसी प्रयास में उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधा हो।
वैसे विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन का विदेश मंत्रालय उन शब्दों का पहले से इस्तेमाल करता रहा है, जो अब शी ने कहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आरोप लगा चुके हैं कि अमेरिका चीन को दबाने या उसे घेरने की कोशिश कर रहा है। चीन के कूटनीति प्रमुख वांग यी और विदेश मंत्री ची कांग भी ऐसे बयान दे चुके हैं। इसके बावजूद शी जिनपिंग के इन शब्दों का इस्तेमाल करने को महत्त्वपूर्ण माना गया है। विश्लेषकों के मुताबिक इस बयान का मतलब यह भी समझा जाएगा कि शी ने अपने देशवासियों को युद्ध जैसे हालात के लिए तैयार रहने के लिए आगाह किया है।