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चीन ने दिया झांसा?: नेपाल के साथ किए कई समझौते, अब लागू करने पर संदेह
Sun, 03 Apr 2022 02:19 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sun, 03 Apr 2022 02:19 PM IST
सार
चीन ने नेपाल से हर तरह का आयात रोक रखा है। ऐसे में नेपाल से किसी नई वस्तु के निर्यात की गुंजाइश लगभग शून्य है। चीन- नेपाल कारोबार में नेपाल घाटे में है।
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नेपाल-चीन (प्रतीकात्मक)
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विस्तार
चीन के विदेश मंत्री वांग यी की पिछले हफ्ते हुई नेपाल यात्रा के दौरान जो समझौते हुए उन्हें व्यवहार में लागू किया जा सकेगा, इसको लेकर नेपाल में संदेह गहरा गया है। उस दौरान हुए समझौतों के तहत चीन नेपाल में उत्पादित वस्तुओं के आयात पर 98 फीसदी तक शुल्क घटाने पर राजी हुआ। लेकिन विशेषज्ञों ने राय जताई है कि चीन-नेपाल के बीच व्यापार का जो मौजूदा हाल है, उसके बीच संभव है कि यह करार सिर्फ दिखावटी बन कर रह जाए।
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इन विशेषज्ञों के मुताबिक ढाई साल पहले कोरोना महामारी की शुरुआत के समय से चीन ने नेपाल से हर तरह का आयात रोक रखा है। ऐसे में नेपाल से नई वस्तु के निर्यात की गुंजाइश लगभग शून्य है। चीन- नेपाल कारोबार में नेपाल घाटे में है। ऐसे में अगर नेपाल से सचमुच निर्यात बढ़े, तो नेपाल का व्यापार घाटा पाटने में बहुत मदद मिल सकती है। लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों के कारण फिलहाल ऐसी उम्मीद पूरी होती नहीं दिखती।
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नेपाली चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष दिनेश श्रेष्ठ ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘दो साल से चीन कोविड-19 को बहाना बना कर नेपाली वस्तुओं को अपने यहां आने से रोके हुए है। इस कारण नेपाल से चीन के लिए निर्यात लगभग शून्य हो गया है।’ नेपाल के उद्योग, वाणिज्य, और आपूर्ति मंत्रालय के नेपाल ट्रेड इन्फॉर्मेशन पोर्टल के मुताबिक चीन ने नेपाल में उत्पादित करीब आठ हजार वस्तुओं का बिना किसी शुल्क के आयात की सुविधा दे रखी है। चीन को होने वाले कुल निर्यात में इन वस्तुओं का हिस्सा 95 फीसदी है।
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श्रेष्ठ ने कहा- ‘असल सवाल अमल का है। आखिर चीन के लिए नेपाली निर्यात में इतनी तेजी से गिरावट क्यों आई है? इसीलिए हाल में जो समझौते हुए, उन को लेकर चीन सरकार कितनी गंभीरता दिखाएगी, यह असल मुद्दा है।’ 2020-21 में नेपाल ने चीन को सिर्फ लगभग एक अरब रुपये का निर्यात किया। जबकि उसने चीन से 233.92 अरब रुपये का आयात किया। इस तरह नेपाल का व्यापार घाटा 232.90 अरब रुपये का था।
विश्लेषकों के मुताबिक कोरोना महामारी से पहले के वर्ष यानी 2018-19 में नेपाल से चीन को 2.10 अरब रुपये का निर्यात हुआ था। तब चीन सरहदी शहर खासा से निर्यात को आसानी से स्वीकार करता था। इस कारण इस शहर में खुशहाली आई थी। लेकिन साथ ही वहां गैर-कानूनी गतिविधियां भी बढ़ गईं। व्यापारियों के मुताबिक आसान एंट्री प्वाइंट का फायदा उठा कर कुछ लोग तस्करी और वेश्यावृत्ति के धंधे में शामिल हो गए। ऐसी खबरें भी आईं कि तिब्बती उस जगह से गैर-कानूनी ढंग से चीन में घुसपैठ कर रहे हैँ। इन कारणों से चीन का रुख सख्त हो गया।
अब नेपाली व्यापारियों का आरोप है कि चीन ने अघोषित व्यापार नाकेबंदी कर रखी है। सीमा पर महीनों तक खड़े सैकड़ों ट्रकों को उसने अपने यहां नहीं आने दिया। उसके बाद उसने कोटा सिस्टम लागू कर दिया। इसीलिए अब हुए नए समझौते से व्यापारी उत्साहित नहीं हैँ। उन्हें महसूस हो रहा है कि नए समझौते के जरिए चीन ने उन्हें झांसा दिया है।