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चीन की चाल: तिब्बतियों पर कसा और शिकंजा, छात्रों को जबरन मठों से वापस भेज रहा घर

Fri, 05 Nov 2021 06:48 PM IST
मुकेश कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 05 Nov 2021 06:48 PM IST
सार

चीनी अधिकारी किंघई प्रांत में युवा तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं को जबरन मठों से वापस घर भेजने  पर मजबूर कर रहे हैं।

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Chinese authorities force young monks to leave monasteries, go back home in Qinghai province
युवा तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं को मठ छोड़ने पर मजबूर कर रहा चीन - फोटो : ANI

विस्तार

चीन तिब्बतियों को लगातार परेशान कर रहा है। इस बीच चीनी अधिकारी किंघई प्रांत में युवा तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं को मठ छोड़ने और वापस घरों में भेजने को मजबूर कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने जाख्युंग मठ और किंघई में अन्य मठों से युवा भिक्षुओं को मठ छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है और उन्हें घर वापस भेजा जा रहा है।  रेडियो फ्री एशिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि चीन द्वारा यह कदम 1 अक्तूबर को घोषित धार्मिक मामलों के नियमों के तहत है। चीनी सरकारी अधिकारी इन मठों का निरीक्षण कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नियमों का पालन किया जा रहा है।

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अब मठों में नहीं लौट सकते तिब्बती छात्र
रिपोर्ट्स के मुताबिक भिक्षुओं से कहा गया है कि वे अब मठों में नहीं लौट सकते और भिक्षुओं के वस्त्र नहीं पहन सकते हैं। उन्हें सरकारी स्कूलों में भेजा जाएगा या नहीं, यह भी साफ नहीं है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सरकार के आदेश का उल्लंघन करने वाले को 'गंभीर कानूनी परिणाम और सजा' का सामना करना पड़ेगा। दरअसल, चीन द्वारा घोषित नए नियम 20 अक्तूबर को लागू किए गए थे और इसके मुताबिक किंघई मठ में अब कम उम्र के लड़के भिक्षु नहीं बन सकते हैं और उन्हें धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
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तिब्बती भाषा की कक्षाओं पर भी प्रतिबंध
वहीं, चीनी अधिकारियों ने अनौपचारिक तिब्बती भाषा की कक्षाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया है जो बच्चे अपने स्कूल से बाहर सीखने को जाते हैं। चीनी अधिकारियों ने तिब्बती संस्कृति पर कारवाई करते हुए दो तिब्बती छात्रों को हिरासत में लिया था। इन छात्रों ने तिब्बती स्कूलों में शिक्षा के एकमात्र माध्यम के रूप में चीनी भाषा के इस्तेमाल को लेकर बीजिंग की योजना का विरोध किया था।

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