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नेपाल: चीन का अंदरूनी मामलों में सीधा दखल, काठमांडों की नीति में बदलाव पर उठाए सवाल

Fri, 22 Apr 2022 03:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 22 Apr 2022 03:47 PM IST
सार

हाउ यांगी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से हुई प्रेस वार्ता में कहा- ‘किसी लोकतांत्रिक देश में सरकारों का बदलते रहना स्वाभाविक है। यह उस देश का आंतरिक मामला होता है। लेकिन सरकार बदलने के साथ नीति में भी बदलाव चिंता का कारण है। इसका खराब असर निवेशकों, खास कर बड़ी परियोजनाओं से जुड़े निवेशकों पर पड़ता है...

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chinese ambassador to nepal hou yanqi shown concern about nepal new policy
चीनी राजदूत हाउ यान्गी - फोटो : twitter@Hou Yanqi

विस्तार

अब चीन के राजदूत ने नेपाल के अंदरूनी मामलों में खुला दखल दिया है। काठमांडू स्थित चीन की राजदूत ने नेपाल में बार-बार हो रहे नीतिगत बदलावों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इससे चीनी निवेशकों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक किसी राजदूत का ऐसा बयान आम तौर पर कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ समझा जाता है। उधर आलोचकों का कहना है कि शेर बहादुर देउबा सरकार ने खुद ऐसे हालात बनाए हैं, जिनमें बड़ी ताकतें खुल कर नेपाल के अंदरूनी मामलों हस्तक्षेप कर रही हैं। देउबा सरकार ने अमेरिका के ऐसे बयानों पर सार्वजनिक आपत्ति नहीं जताई, जिससे चीनी राजदूत का मनोबल बढ़ा।

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समझा जाता है कि बुधीगंडकी पनबिजली परियोजना के निर्माण का ठेका रद्द करने के नेपाली कांग्रेस सरकार के फैसले से चीन नाराज है, जिसका इजहार उसकी राजदूत हाउ यान्गी ने किया। नेपाल की केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली पूर्व कम्युनिस्ट सरकार ने इस परियोजना के निर्माण का कार्य चीन की कंपनी गेझाउबा ग्रुप कॉरपोरेशन को देने का फैसला किया था। ये निर्णय 2018 में लिया गया था। लेकिन बीते सात अप्रैल को देउबा सरकार ने ये ठेका रद्द करने का फैसला किया।

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नीति में भी बदलाव चिंता का कारण

हाउ यांगी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से हुई प्रेस वार्ता में कहा- ‘किसी लोकतांत्रिक देश में सरकारों का बदलते रहना स्वाभाविक है। यह उस देश का आंतरिक मामला होता है। लेकिन सरकार बदलने के साथ नीति में भी बदलाव चिंता का कारण है। इसका खराब असर निवेशकों, खास कर बड़ी परियोजनाओं से जुड़े निवेशकों पर पड़ता है। पनबिजली परियोजनाओं या अन्य उद्योगों के निर्माण में समय लगता है। इनके लिए निवेशक लंबे समय की योजना बना कर निवेश करते हैं। नीतियों में बार-बार बदलाव का खराब असर उन पर पड़ता है।’

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चीनी राजदूत ने परियोजनाओं के निर्माण के लिए नेपाल में भूमि अधिग्रहण और पेड़ कटाई से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘हमारी अपेक्षा है कि नेपाल सरकार इन समस्याओं को दूर करेगी।’ हाऊ ने इस आरोप का खंडन किया कि चीन ने चीन- नेपाल सीमा पर आवाजाही में रुकावटें खड़ी कर रखी हैं। उन्होंने कहा कि कुछ रुकावटें महामारी के कारण खड़ी की गई हैं। इसके बावजूद पिछले साल चीन और नेपाल के बीच व्यापार में 63 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। हाऊ ने दावा किया कि इससे सीमा बंद किए जाने की बात गलत साबित हो जाती है।

चीन की बढ़ रही बेसब्री

विश्लेषकों के मुताबिक हाऊ का ताजा बयान देउबा सरकार बनने के बाद से नेपाल की विदेश नीति में आए बदलाव के प्रति चीन में बढ़ती बेसब्री का संकेत देता है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा का झुकाव स्पष्ट तौर पर भारत और अमेरिका की तरफ ज्यादा है। इसी कारण पिछले महीने चीन के विदेश मंत्री वांग यी की काठमांडू यात्रा का नतीजा भी चीन की अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रहा।



इसके पहले देउबा सरकार ने अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की सहायता स्वीकार करने के करार को संसदीय मंजूरी दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। साथ ही यूक्रेन मामले में लगातार नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के मन-माफिक मतदान किया है।

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