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भारत से लगती सीमा पर तैनात चीनी सुरक्षा गार्ड, पूरी तरह होगा सेना का नियंत्रण

Fri, 23 Mar 2018 08:49 AM IST
एजेंसी, बीजिंग 
एजेंसी, बीजिंग  Updated Fri, 23 Mar 2018 08:49 AM IST
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Xi Jinping power play: China frontier troops along with indian border

चीन ने भारत से लगती सीमा पर निगरानी करने वाली फ्रंटियर ट्रूप्स को असैन्य नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करते हुए चीनी सेना के नियंत्रण में कर दिया है। चीन के सरकारी मीडिया ने यह जानकारी देते हुए इसे भारत से सटी सीमा पर चीनी सुरक्षा गार्डों को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव बताया है। 

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राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) ने देश के सशस्त्र बलों पर सत्तारूढ़ पार्टी का प्रभाव बढ़ाने के लिए पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (पीएपी) से असैन्य संस्थानों के नियंत्रण में काम करने वाले फ्रंटियर डिफेंस ट्रूप्स को पूरी तरह से हटा दिया है। 
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‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक ये जवान पहले पीएपी का हिस्सा थे और इसका प्रबंधन इंस्टीट्यूट ऑफ स्टेट काउंसिल द्वारा होता था। अब इसे सिस्टम से पूरी तरह से हटा दिया गया है, जिससे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और दूसरे राष्ट्रीय सशस्त्र बल पूरी तरह से पार्टी के नियंत्रण में आ गए हैं। 
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पीएलए द्वारा प्रकाशित एक लेख में बुधवार को इससे संबंधित जानकारी दी गई। चीन के सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि नागरिक मामलों से संबंधित सशस्त्र पुलिस फोर्स के हटने से कमांड की चेन में जटिलता खत्म हो जाएगी। इसके बाद अब 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) समेत अन्य बॉर्डर ट्रूप्स सीधे तौर पर चीनी सेना पीएलए के अधीन आ जाएंगे। 

उल्लेखनीय है कि पीएलए पूरी तरह से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के तहत काम करती है और चीन के दोबारा आजीवन राष्ट्रपति बनने से उनकी ताकत बढ़ी है।

तटरक्षक बल समेत कई सेवाओं में हुए बदलाव 

नए आदेशों में चीन के तटरक्षक दल भी शामिल हैं जिनके जहाज अक्सर पूर्वी-चीन सागर में जापान के विवादित द्वीपों के पास पहुंचते हैं। ये तटरक्षक दल अब तक सरकारी समुद्री प्रशासन के नेतृत्व में काम करते थे लेकिन अब ये भी सशस्त्र पुलिस बलों के रूप में अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।


इसी तरह सोना, वानिकी और जलविद्युत के क्षेत्र में सेवाएं देने वाली हथियारबंद पुलिस पहले नागरिक-संबंधी ड्यूटी करती थी, लेकिन उसकी सेवाएं अब सरकारी संस्थाओं में स्थानांतरित किया जा चुकी हैं। 

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