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चीन ने बनाया समंदर पर दुनिया का सबसे लंबा पुल
बीबीसी हिंदी
Updated Tue, 23 Oct 2018 02:46 PM IST
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दुनिया का सबसे लंबा पुल
- फोटो : PTI
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चीन समंदर पर बने दुनिया के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन करने वाला है। ये 55 किलोमीटर लंबा है। हांगकांग-झुहाई एंड मकाऊ ब्रिज बुधवार को आम जनता के लिए खोला जाएगा। ये नदी या समुद्र, कहीं पर भी बना दुनिया का छठा सबसे लंबा पुल होगा।
ये नया सी ब्रिज साउथ चाइना सी पर पर्ल रिवर डेल्टा के पूर्वी और पश्चिमी छोर को जोड़ेगा। झुहाई चीनी मैनलैंड पर बसा शहर है, जो अब हांगकांग और मकाऊ, दोनों स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन से जुड़ जाएगा।
इस पुल में डुअल थ्री लेन है, जो समुद्र के ऊपर 22.9 किलोमीटर है जबकि 6.7 किलोमीटर समुद्र के नीचे सुरंगनुमा शक्ल में है। इसकी गहराई 44 मीटर तक है। पुल का बाकी हिस्सा जमीन पर बना है। सुरंग के दोनों तरफ दो कृत्रिम द्वीप हैं। ये दोनों 10 लाख वर्ग फुट के ज्यादा इलाके में बने हैं।
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कितना वजन है इस पुल का?
ये पर्ल रिवर एश्चुअरी के छिछले क्षेत्र में बना है ताकि पुल और सुरंग के इलाकों के बीच में ट्रांसिट मिल सके। समुद्र के नीचे जो सुरंग बनी है, वो 33 ब्लॉक से तैयार हुई है।
इनमें से हरेक 38 मीटर चौड़ा, 11.4 मीटर ऊंचा और 80 हजार टन वजनी है। इस पुल में 4 लाख टन स्टील लगा है, जो रिक्टर पैमाने पर 8 की तीव्रता वाले भूकंप को भी आसानी से झेल सकता है। ये पुल काफी वक्त भी बचाएगा।
हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से झुहाई तक जाने में चार घंटे का वक्त लगता है, जो अब घटकर 45 मिनट रह जाएगा। क्वाई चुंग कंटेनर पोर्ट (हांगकांग) और झुहाई के बीच आने-जाने में लगने वाला समय साढ़े तीन घंटे से कम होकर सवा घंटे रह जाएगा।
हालांकि इस पुल की आलोचना करने वाले भी कम नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि इस पुल के जरिए चीन हांगकांग और मकाऊ पर अपने नियंत्रण का राजनीतिक संदेश देना चाहता है।
कितना खर्च आया है इस ब्रिज पर?
हांगकांग और मकाऊ दोनों अतीत में यूरोपीय ताकतों की कॉलोनी रहे हैं और 1990 से दशक में इनका नियंत्रण चीन को मिला है। ये दोनों 'वन कंट्री, टू सिस्टम' सिद्धांत पर चलते हैं, जो उन्हें 50 साल के लिए चीन से स्वतंत्र अपना सरकारी तंत्र चलाने की इजाजत देता है।
ये ब्रिज तीनों शहरों के बीच की दूरी महज एक घंटे पर ले आएगा और इससे आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा। इस परियोजना का विचार साल 2003 में आया था और दिसंबर 2009 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। इस पर कुल 120 अरब युआन या 17।3 अरब डॉलर का खर्च आया है।
इसका खर्च हांगकांग, झुहाई और मकाऊ की सरकारें मिलकर उठा रही हैं।
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ये नया सी ब्रिज साउथ चाइना सी पर पर्ल रिवर डेल्टा के पूर्वी और पश्चिमी छोर को जोड़ेगा। झुहाई चीनी मैनलैंड पर बसा शहर है, जो अब हांगकांग और मकाऊ, दोनों स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन से जुड़ जाएगा।
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इस पुल में डुअल थ्री लेन है, जो समुद्र के ऊपर 22.9 किलोमीटर है जबकि 6.7 किलोमीटर समुद्र के नीचे सुरंगनुमा शक्ल में है। इसकी गहराई 44 मीटर तक है। पुल का बाकी हिस्सा जमीन पर बना है। सुरंग के दोनों तरफ दो कृत्रिम द्वीप हैं। ये दोनों 10 लाख वर्ग फुट के ज्यादा इलाके में बने हैं।
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कितना वजन है इस पुल का?
ये पर्ल रिवर एश्चुअरी के छिछले क्षेत्र में बना है ताकि पुल और सुरंग के इलाकों के बीच में ट्रांसिट मिल सके। समुद्र के नीचे जो सुरंग बनी है, वो 33 ब्लॉक से तैयार हुई है।
इनमें से हरेक 38 मीटर चौड़ा, 11.4 मीटर ऊंचा और 80 हजार टन वजनी है। इस पुल में 4 लाख टन स्टील लगा है, जो रिक्टर पैमाने पर 8 की तीव्रता वाले भूकंप को भी आसानी से झेल सकता है। ये पुल काफी वक्त भी बचाएगा।
हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से झुहाई तक जाने में चार घंटे का वक्त लगता है, जो अब घटकर 45 मिनट रह जाएगा। क्वाई चुंग कंटेनर पोर्ट (हांगकांग) और झुहाई के बीच आने-जाने में लगने वाला समय साढ़े तीन घंटे से कम होकर सवा घंटे रह जाएगा।
हालांकि इस पुल की आलोचना करने वाले भी कम नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि इस पुल के जरिए चीन हांगकांग और मकाऊ पर अपने नियंत्रण का राजनीतिक संदेश देना चाहता है।
कितना खर्च आया है इस ब्रिज पर?
हांगकांग और मकाऊ दोनों अतीत में यूरोपीय ताकतों की कॉलोनी रहे हैं और 1990 से दशक में इनका नियंत्रण चीन को मिला है। ये दोनों 'वन कंट्री, टू सिस्टम' सिद्धांत पर चलते हैं, जो उन्हें 50 साल के लिए चीन से स्वतंत्र अपना सरकारी तंत्र चलाने की इजाजत देता है।
ये ब्रिज तीनों शहरों के बीच की दूरी महज एक घंटे पर ले आएगा और इससे आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा। इस परियोजना का विचार साल 2003 में आया था और दिसंबर 2009 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। इस पर कुल 120 अरब युआन या 17।3 अरब डॉलर का खर्च आया है।
इसका खर्च हांगकांग, झुहाई और मकाऊ की सरकारें मिलकर उठा रही हैं।