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रिटायर्ड इंस्पेक्टर कुलदीप की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

Wed, 04 May 2016 11:44 AM IST
ब्यूरो, चंडीगढ़
ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Wed, 04 May 2016 11:44 AM IST
सार

- वीजा लगवाने के नाम पर की थी डेढ़ लाख की ठगी
- रिटायर्ड होने के बावजूद खुद को बताया था इंस्पेक्टर 

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विस्तार

विदेश भेजने के लिए वीजा लगवाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी यूटी पुलिस से रिटायर्ड इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह धालीवाल की अग्रिम जमानत याचिका अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी। इससे पहले इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने धारीवाल की जमानत का विरोध किया था। याचिका पर बहस के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। एएसपी की जांच के बाद इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस ने इसी साल 24 अप्रैल को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में संबंधित केस दर्ज किया था। मामले में शिकायतकर्ता सेक्टर 29-डी के एससीओ नंबर 202 निवासी गुरनाम सिंह थे। उन्होंने सेक्टर-38 डी निवासी कुलदीप सिंह धालीवाल समेत मनिंदर सिंह के खिलाफ इंडस्ट्रियल एरिया थाने में केस दर्ज करवाया था। मनिंदर सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। 
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एसएसपी को दी शिकायत में गुरनाम सिंह ने कहा था कि उनके साथ दोनों आरोपियों ने डेढ़ लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। शिकायत के मुताबिक एक दिन कुलदीप सिंह धालीवाल शिकायतकर्ता की दुकान पर आया और खुद को चंडीगढ़ पुलिस का इंस्पेक्टर बताया। उसने कहा कि वह जल्द ही डीएसपी प्रमोट होने वाला है। इसी तरह उसने मनिंदर सिंह को अपने दोस्त और गार्ड के तौर पर मिलवाया। 
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कुलदीप सिंह  ने बताया कि मनिंदर यूएसए का 10 वर्ष का मल्टीपल वीजा लगवाता है। दोनों को सरकारी कर्मी पाकर शिकायतकर्ता 4.30 लाख रुपये देने को तैयार हो गया। इसमें से उसने 1.50 लाख रुपये दिए थे। उसमें से 20 हजार रुपये नकद और बाकी 1.30 लाख रुपये चेक के माध्यम से दिए थे। शिकायतकर्ता के बेटे सुरजीत सिंह और मनिंदर सिंह ने 28 नवंबर को स्टैंप पेपर पर साइन किए। एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि वीजा न लगने की सूरत में उनके रुपये वापस दे दिए जाएंगे। वीजा न लगने पर शिकायतकर्ता ने अपने डेढ़ लाख रुपये मांगे तो आरोपी पक्ष टालमटोल करता रहा। बाद में आरोपी पक्ष ने उन्हें एचडीएफसी बैंक का 1.50 लाख रुपये का चेक दिया जो बैलेंस न होने के कारण बाउंस हो गया। इस पर शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था।
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