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चीनी मीडिया ने अमेरिका और जापान को बताया कागजी शेर, नपुंसक से की तुलना

Thu, 14 Jul 2016 03:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 14 Jul 2016 03:59 PM IST
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SCS-MEDIA Chinese media brands US, Japan 'paper tigers', 'eunuchs'

चीन की सरकारी मीडिया ने अमेरिका और जापान को कागजी शेर बताते हुए कहा है कि ये नपुंसक है। आगे कहा गया है कि यदि अमेरिकी युद्ध पोत चीन द्वारा दावा किए गए द्वीपों के पास किसी भी प्रकार से आदेश को लागू कराने की कोशिश की तो चीनी सेना 'जवाबी हमले' के लिए तैयार है।

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चीन के  सरकारी मीडिया का हिस्सा ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित किए गए सम्पादकीय में लिखा गया है कि बन्दर धमकी  देने वाला अमेरिका दक्षिण चीन सागर में कागज का शेर है। इसमें लिखा गया है कि कई राजनेता और कांग्रेस के लोग हाऊस और सीनेट ने चीन के समक्ष चुनौती पैदा करने के लिए उग्र टिप्पणी की है।
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लिखा गया है कि जापान की मुद्रा भी अमेरिकी रुख की तरह है। फिलीपींस के रुख पर सम्पादकीय में लिखा गया है कि जिसने चीन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अदालत में याचिका दायर की थी उसका रुख बाकियों के अपेक्षाकृत हल्का है। सम्पादकीय में फिलीपींस का रुख संयमित बताया गया है।
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एक चीनी कहावत का जिक्र करते हुए लिखा है कि 'सम्राट चिंता नहीं करता लेकिन उसके नपुंसक को रहती है'। इसका मतलब है कि खिलाड़ी से ज्यादा चिंता बाहरियों को है। इस मामले में वाशिंगटन और टोक्यो नपुंसकों की तरह चिंता कर रहे हैं।

ये है मामला

SCS-MEDIA Chinese media brands US, Japan 'paper tigers', 'eunuchs'

इससे पहले दक्षिण चीन सागर (एससीएस) पर चीन के दावे को हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने खारिज कर दिया था। एसएससी पर एकाधिकार का दावा करने वाले चीन को संयुक्त राष्ट्र समर्थित अदालत ने ने कड़ी फटकार लगाई थी। बीते मंगलवार को अदालत ने चीन के दावों को तगड़ा झटका देते हुए कड़े शब्दों में कहा था कि एससीएस पर उसके एकाधिकार का कोई भी कानूनी आधार नहीं है।

इस फैसले पर जहां फिलीपींस ने खुशी जताई थी वहीं, चीन ने फिर दोहराया था कि वह फैसले को नहीं मानेगा। इससे दक्षिण चीन सागर का विवाद और गहराने के आसार बढ़ गए हैं।

गौरतलब है कि साल 2013 में फिलीपींस दक्षिण चीन सागर का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट लेकर गया था। उस पर सुनवाई करते हुए नीदरलैंड के हेग में परमानेंट कोर्ट ऑफ अर्बिर्टेशन (पीसीए) ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया था। इस अंतरराष्ट्रीय अदालत ने न सिर्फ चीन के एकाधिकार के दावे को नकारा बल्कि उसे दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने का दोषी भी पाया।

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