चांद की ‘डार्क साइड’ पर पहली बार लैंडिंग करेगा चीन का रोवर, ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश
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चीन ने अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। शनिवार तड़के चीन ने चांद की दूसरी ओर की सतह (डार्क साइड) पर लैंड कराने के लिए एक रोवर प्रक्षेपित किया, जो चंद्रमा के अज्ञात क्षेत्रों का पता लगाएगा। चीन यह मिशन भेजने वाला विश्व का पहला देश है। चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दक्षिण पश्चिमी शिचांग के प्रक्षेपण केंद्र से लांग मार्च 3बी रॉकेट के जरिये ‘चांग ई-4’ का सफल लांचिंग की गई।
बीजिंग के इस चंद्र अभियान का नाम चीनी पौराणिक कथाओं की चंद्रमा देवी के नाम पर ‘चांग ई-4’ रखा गया है। चांद के आगे वाला हिस्सा जो हमेशा धरती के सामने होता है, वहां कई समतल क्षेत्र हैं और रोवर के लिए वहां उतरना काफी आसान होता है। लेकिन चांद की दूसरी ओर की सतह क्षेत्र पहाड़ी और काफी ऊबड़-खाबड़ है। ऐसे में रोवर की लैंडिंग कराना काफी चुनौतीपूर्ण है। हार्वर्ड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के खगोलविद जोनाथन मैकडोवेल ने कहा कि यह आसान तकनीक नहीं है। चीन के इस पल के लिए बीते कई वर्षों से तैयारी कर रहा था।
नए साल पर लैंड करने की उम्मीद
इस रोवर के नए साल के आसपास चंद्रमा की सतह पर लैंड करने की उम्मीद है। चांग ई-4 की सफल लांचिंग ने चीन के चंद्र अन्वेषण मिशन की लंबी यात्रा की अच्छी शुरुआत की है, जो अंधेरी सतह पर नए प्रयोगों और असंगत इलाकों का पता लगाएगा।
सोवियत संघ ने ली थी पहली तस्वीर
1959 में पहली बार सोवियत संघ ने चंद्रमा की दूसरी तरफ की सतह की पहली तस्वीर ली थी, जिससे चंद्रमा की डार्क साइड के कुछ रहस्यों को सुलझाने में मदद मिली थी। अभी तक कोई भी लैंडर या रोवर चांद की दूसरी ओर की सतह पर नहीं उतर सका है।
रोवर से संपर्क स्थापित करना थी सबसे बड़ी चुनौती
चांद की दूसरी ओर की सतह होने के कारण इस मिशन में सबसे बड़ी चुनौती रोबोटिक लैंडर (रोवर) के साथ संपर्क स्थापित करने की थी। इसके लिए चीन ने मई में क्यूक्यिाओ सेटेलाइट को चांद की कक्षा में स्थापित किया ताकि लैंडर और धरती के बीच डाटा और सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा सके।