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अकेला पड़ा उत्तर कोरिया, जंग हुई तो चीन नहीं देगा साथ!

Thu, 12 Oct 2017 01:26 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Thu, 12 Oct 2017 01:26 PM IST
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north korea will be alone in war, china withdraw its hand
किम जोंग उन - फोटो : बीबीसी

उत्तर कोरिया से महज आठ किलोमीटर दूर चीन के लायोनिंग प्रांत के डैंडोंग में चीन और उत्तर कोरिया के पूर्व नेताओं - माओत्से तुंग और किम-II सुंग की मूर्तियां दोनों देशों के बीच पुराने रिश्ते की गवाही देती हैं। लेकिन हाल के दिनों में उत्तर कोरिया को लेकर चीन की भाषा में बदलाव आया है।

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साल 2012 में में जब किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया की सत्ता संभाली और मिसाइल और परमाणु परिक्षण को जारी रखा तो कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ गया। बीबीसी चीनी सेवा के अनुसार, तबसे उत्तर कोरिया को लेकर चीन की आधिकारिक स्थिति और उसकी आधिकारिक भाषा में लगातार बदलाव आया है। हालांकि चीन और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया अभी भी आधिकारिक सहयोगी हैं।
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कैसे बदलती गई भाषा
1. दोनों देशों के बीच 1961 में दोस्ताना सहयोग और एक-दूसरे की मदद के समझौते को 1981 और 2001 में बढ़ाया गया, जो अब 2021 तक लागू रहेगा। समझौते के तहत उत्तर कोरिया पर बाहरी हमले की स्थिति में चीन उसकी सैन्य मदद करेगा।

लेकिन, बीजिंग की अब आधिकारिक स्थिति 'कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु निःशस्त्रीकरण, स्थायित्व और शांति को बनाए रखते हुए परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को कूटनीति और बातचीत के जरिए हल' करना हो गया है। इसीलिए उत्तर कोरिया जब भी परमाणु परीक्षण करता है, चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान जरूर आता है।

चीन ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के खिलाफ जताई आपत्ति

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2. इसी तरह के बयान में ये साफ दिख रहा है कि अब चीन अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज्यादा जोर दे रहा है। चीन के सरकारी मीडिया ने नौ अक्टूबर 2006 को एक बयान जारी किया था जिसमें परमाणु हथियारों के परीक्षण पर अंततराष्ट्रीय समुदाय को उत्तर कोरिया की ओर से नजरअंदाज किए जाने पर 'घोर आपत्ति' जताई गई थी।

3. इसके अगले तीन बयानों (25 मई, 2009; 12 फरवरी, 2013 और छह जनवरी, 2016) में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के खिलाफ आपत्ति बढ़ती गई।

4. पिछले साल जब 9 सितम्बर 2016 को उत्तर कोरिया ने अपना पांचवां परमाणु परीक्षण किया तो चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग के अपने वादे को दुहराया और फिर से आपत्ति दर्ज कराई।

5. अभी हाल ही में जब उत्तर कोरिया ने छठां परमाणु परीक्षण किया तो चीन की स्थिति घोर आपत्ति से 'निर्णायक आपत्ति' में बदल गई। साथ ही चीन ने बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग और उत्तर कोरिया के खिलाफ 'संयुक्त राष्ट्र सुक्षा परिषद के प्रतिबंधों को पूरी तरह और व्यापक रूप से लागू करने' की घोषणा की गई।

6. जब पिछले अगस्त में जापान के ऊपर से उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण किया तो चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में इसे 'उत्तर कोरियाई संकट' कहा गया।

7. अगस्त में ही चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक संपादकीय में इस बात का संकेत दिया कि अगर अमरीका ने उत्तर कोरिया पर पहले हमला करता है तो चीन बचाव करेगा लेकिन अगर उत्तर कोरिया ने हमला किया तो वो न्यूट्रल बना रहेगा। उदाहरण के लिए अगर उत्तर कोरिया गुआम पर हमला बोलता है तो चीन आगे नहीं आएगा।

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