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नेपाल बना चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल का हिस्सा, भारत की चिंता बढ़ी

Sat, 13 May 2017 05:39 AM IST
एजेंसी/ काठमांडू 
एजेंसी/ काठमांडू  Updated Sat, 13 May 2017 05:39 AM IST
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nepal joins china s one belt one road initiative

एशिया को यूरोप से जोड़ने वाली चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल में शामिल होने के लिए नेपाल ने आज चीन के साथ करार पर हस्ताक्षर कर दिए। नेपाल का यह कदम भारत के लिए चिंता पैदा कर सकता है। बीजिंग में 14 और 15 मई को होने वाली ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) फोरम से पहले समझौते पर दस्तखत किए गए हैं। 

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नेपाल में चीन के राजदूत यू हांग और नेपाल के विदेश सचिव शंकर बैरागी ने काठमांडू के सिंघ दरबार में स्थित विदेश मंत्रालय में एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री कृष्ण बहादुर महारा और विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत इस दौरान उपस्थित रहे।
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विदेश मंत्री महत ने कहा, ‘दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के मद्देनजर यह समझौता काफी महत्वपूर्ण है। सड़क और रोड की कनेक्टिविटी हमारे लिए जरूरी है और हम क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं।’ हालांकि भारत ने बीजिंग की इस पहल का विरोध किया था और ऐसे में नेपाल का चीन को समर्थन भारत की चिंता बढ़ा सकता है। 
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इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ शुक्रवार को बीजिंग पहुंच गए। ‘बेल्ट एंड रोड’ (बी एंड आर) फोरम फॉर इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन में दुनिया भर से 28 देशों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। रविवार को शुरू हो रहे इस सम्मेलन में बीजिंग का उद्देश्य इस पहल को वैश्विक स्वीकृति दिलाना है। 


बी एंड आर फोरम का उद्देश्य सड़क, ट्रेन और समुद्री पोर्ट प्रोजेक्ट के माध्यम से चीन को यूरेशिया से जोड़ना है। सीपीईसी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वकांक्षी पहल ‘बेल्ट एंड रोड’ का ही एक हिस्सा है। जिसका उद्देश्य चीन के साथ एशिया, अफ्रीका और यूरोपीय बाजार को जोड़ने वाले ऐतिहासिक मार्गों एवं समुद्री मार्ग जैसे न्यू सिल्क रोड, 21 वीं सदी की मैरीटाइम सिल्क रोड को पुनर्जीवित करना है। भारत के इस सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अभी संशय बरकरार है। 

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