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चीन ने रूस को भी किया नजरअंदाज, कहा- NSG में भारत की 'नो एंट्री'!
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Tue, 06 Jun 2017 08:06 PM IST
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भारत-चीन संबंध (प्रतीकात्मक)
- फोटो : InShorts
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चीन ने साफ कर दिया है कि वो एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध करता रहेगा। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि रूस ने भारत की
सदस्यता को लेकर चीन से बातचीत की थी, पर चीन अपने फैसले पर अडिग है। वो एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध करता रहेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग का ये बयान भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें स्वराज ने कहा था कि हम रूस के साथ एनएसजी मसले को लेकर बातचीत कर रहे हैं। एनएसजी में रूस की वजह से एंट्री मिल जाएगी, क्योंकि वो चीन को संभाल लेगा। पर चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के बाद साफ हो गया है कि चीन भारत की एनएसजी सदस्यता को लेकर पूरी तरह से अड़ा हुआ है और वो इस मामले में रूस की भी नहीं सुनेगा।
अगले माह होगी एनएसजी की बैठक, एंट्री के लिए भारत ने एक बार फिर कसी कमर
चीन ने साफ कहा कि एनएसजी में नए हालातों के चलते किसी भी नए सदस्य का आना ठीक नहीं होगा। 48 देशों की सदस्यता वाला एनएसजी, परमाणु व्यापार को नियंत्रित करता है और भारत भी इसकी सदस्यता पाना चाहता है, लेकिन चीन लगातार अड़ीयल रुख अपनाए बैठा हुआ है। हालांकि, कई सदस्य भारत के समर्थन में हैं।
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चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एनएसजी में पुराना जैसा कुछ नहीं है और नए हालातों को देखते हुए जो देश जुड़ना चाहते हैं, वे उस लायक नहीं हैं। हालांकि, चीन ने एनएसजी को गैर-भेदभावपूर्ण और सार्वभौमिक रूप से लागू समाधान तक पहुंचने के लिए सभी सदस्यों के परामर्श का समर्थन किया है।
NSG पर फिर रोड़ा अटकाने की तैयारी में चीन, कहा- नहीं बदलेंगे अपना रवैया
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि 'अगले महीने होने वाले सम्मेलन में वह गैर-एनपीटी राष्ट्रों के एनएसजी में भागीदारी के अपने पुराने रवैये पर कायम रहेगा।'
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सदस्यता को लेकर चीन से बातचीत की थी, पर चीन अपने फैसले पर अडिग है। वो एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध करता रहेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग का ये बयान भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें स्वराज ने कहा था कि हम रूस के साथ एनएसजी मसले को लेकर बातचीत कर रहे हैं। एनएसजी में रूस की वजह से एंट्री मिल जाएगी, क्योंकि वो चीन को संभाल लेगा। पर चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के बाद साफ हो गया है कि चीन भारत की एनएसजी सदस्यता को लेकर पूरी तरह से अड़ा हुआ है और वो इस मामले में रूस की भी नहीं सुनेगा।
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चीन ने साफ कहा कि एनएसजी में नए हालातों के चलते किसी भी नए सदस्य का आना ठीक नहीं होगा। 48 देशों की सदस्यता वाला एनएसजी, परमाणु व्यापार को नियंत्रित करता है और भारत भी इसकी सदस्यता पाना चाहता है, लेकिन चीन लगातार अड़ीयल रुख अपनाए बैठा हुआ है। हालांकि, कई सदस्य भारत के समर्थन में हैं।
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चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एनएसजी में पुराना जैसा कुछ नहीं है और नए हालातों को देखते हुए जो देश जुड़ना चाहते हैं, वे उस लायक नहीं हैं। हालांकि, चीन ने एनएसजी को गैर-भेदभावपूर्ण और सार्वभौमिक रूप से लागू समाधान तक पहुंचने के लिए सभी सदस्यों के परामर्श का समर्थन किया है।
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चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि 'अगले महीने होने वाले सम्मेलन में वह गैर-एनपीटी राष्ट्रों के एनएसजी में भागीदारी के अपने पुराने रवैये पर कायम रहेगा।'