भारत की मुसीबत बढ़ी, चीन का पहला स्वदेश निर्मित विमानवाहक युद्धपोत दूसरे परीक्षण के लिए तैयार
चीन का पहला स्वदेश निर्मित विमानवाहक युद्धपोत समुद्र में अपने दूसरे परीक्षण के लिए पूरी तरह तैयार है। 50,000 टन के इस जहाज ने अपना पहला परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था। यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट ने दी है। 001ए टाइप के इस युद्धपोत के बाहर की तरफ किया जा रहा काम कल ही पूरा हुआ है। अब यह अपने दूसरे परीक्षण के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इस युद्धपोत का पहला परीक्षण 13 मई से 18 मई तक चला था। एक मिलिट्री विशेषज्ञ के मुताबिक इसके पहले परीक्षण की सफलता से साबित हो गया है कि अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसे साल 2020 तक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को दिया जा सकता है।
पांच दिन तक चले पहले समुद्री परीक्षण के बाद युद्धपोत को 23 मई को पूर्वोत्तर चीन के लिओनिंग प्रांत के डालियन शिपयार्ड में भेजा गया था। ताकि उसमें मरम्मत से संबंधित काम पूरा किया जा सके। हालांकि चीन के पास पहले से भी एक युद्धपोत मौजूद है जिसका नाम है लिओनिंग। जो इस वक्त सेवा में है।
समुद्री मार्गों में बढ़ेगी चीन की पैठ
चीनी सेना को मजबूत करने और समुद्री इलाकों में उसकी पैठ बनाने के लिए इस युद्धपोत को तैयार किया गया है। इस महीने यह अपना दूसरा परीक्षण भी पूरा कर लेगा। चीन की जहाज बनाने बाली कंपनी सीएसआईसी के अध्यक्ष ने 21 जून को कंपनी की वेबसाइट के जरिए से इसके पहले सफल परीक्षण की जानकारी दी थी। इस परीक्षण का उद्देश्य जहाज के प्रणोदन प्रणाली की विश्वसनीयता और क्षमता की जांच करना है। इसे साल 2013 में बनाना शुरू किया गया था।
इसकी खासियत है कि इसमें 12,000 उपकरण मौजूद हैं। जिन्हें चीन की 532 कंपनियों ने तैयार किया है। इस पोत में 3200 केबिन हैं और रोजाना इसमें 3,000 मजदूर काम कर सकते हैं। नौसेना का कहना है कि इस युद्धपोत के कई फीचर लिओनिंग से काफी अलग हैं।
दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं जिनके पास युद्धपोत हैं। इसमें भारत के अलावा अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, थाईलैंड और चीन का नाम शामिल हैं। इन देशों में सबसे ज्यादा युद्धपोत अमेरिका के पास हैं। जिनकी संख्या 11 है और हर एक का वजन एक लाख टन है।