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ताइवान की अमेरिका से 'दोस्ती' पर भड़का चीन, दी बल प्रयोग की धमकी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Dec 2016 04:04 PM IST
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चीन
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अमेरिका के नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ताइवान के राष्ट्रपति साइ इंग वेन के बीच फोन पर हुई बातचीत से चीन तिलमिला उठा है। चीन ने सार्वजनिक तौर पर ताइवान में बल प्रयोग करने की वकालत की है। चीन के सरकारी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने संपादकीय में लिखा है, 'अब समय आ गया है जब चीन अपनी ताइवान नीति को दोबारा तैयार करें जिसमें बल प्रयोग प्रमुख विकल्प हो और सावधानीपूर्वक इसके लिए तैयार होना चाहिए।'
चीन की सरकार विदेश नीति से जुड़ी अहम टिप्पणियों के लिए इसके संपादकीय का सहारा लेती है। अमेरिका-ताइवान की नजदीकी पर चीन के विदेशमंत्री ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इस (ट्रंप और साइ के बीच) फोन कॉल के बाद चीन और अमेरिका के संबंध खराब नहीं होंगे।
गौरतलब है कि अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने कई दशकों पुरानी 'वन चाइना पॉलिसी' में बदलाव के संकेत दिए हैं। इस पॉलिसी के तहत अमेरिका ताइवान को चीन का हिस्सा मानता है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को इस नीति से कोई लाभ नहीं हो रहा है फिर क्यों इससे बंधा जाए।
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चीन की सरकार विदेश नीति से जुड़ी अहम टिप्पणियों के लिए इसके संपादकीय का सहारा लेती है। अमेरिका-ताइवान की नजदीकी पर चीन के विदेशमंत्री ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इस (ट्रंप और साइ के बीच) फोन कॉल के बाद चीन और अमेरिका के संबंध खराब नहीं होंगे।
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गौरतलब है कि अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने कई दशकों पुरानी 'वन चाइना पॉलिसी' में बदलाव के संकेत दिए हैं। इस पॉलिसी के तहत अमेरिका ताइवान को चीन का हिस्सा मानता है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को इस नीति से कोई लाभ नहीं हो रहा है फिर क्यों इससे बंधा जाए।
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क्या है मु्ददा
डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : Forbes
दरअसल, ताइवान स्वंय को स्वतंत्र राष्ट्र मानता है जबकि चीन उसे अपना ऐसा हिस्सा बताता है जो अलग हो गया हो। 1979 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कॉर्टर ने ताइवान को चीन का हिस्सा मान लिया था और उससे अपने पृथक राजनयिक संबंध खत्म कर लिए थे। तभी से अमेरिका 'वन चाइना पाॉलिसी' का पालन कर रहा है।
बीते चार दशक में यह पहला मौका है, जब अमेरिका के किसी निर्वाचित राष्ट्रपति या राष्ट्रपति ने ताइवान के राष्ट्रपति से बात की है। इसे लेकर चीन नाराज है।
बीते चार दशक में यह पहला मौका है, जब अमेरिका के किसी निर्वाचित राष्ट्रपति या राष्ट्रपति ने ताइवान के राष्ट्रपति से बात की है। इसे लेकर चीन नाराज है।