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चीनी मीडिया का दावा- दक्षिण चीन सागर मसले पर भारत उसके साथ

Thu, 14 Jul 2016 12:13 PM IST
एजेंसी/ बीजिंग
एजेंसी/ बीजिंग Updated Thu, 14 Jul 2016 12:13 PM IST
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Chinese State Media Claims India Supports Beijing On South China Sea
फैसले से क्षेत्र में तनाव बढ़ना तय - फोटो : Reuters

चीन के सरकारी अखबार ने भारत को उन देशों में शामिल बताया है जो दक्षिण चीन सागर के मसले पर उसके रुख का समर्थन करते हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दक्षिण चीन सागर पर चीन की दावेदारी को खारिज कर दिया था।

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सरकारी अखबार ने अपनी वेबसाइट पर दिखाए नक्शे में भारत को दक्षिण चीन सागर पर चीन के समर्थक देशों के रूप में दर्शाया है। वेबसाइट के मुताबिक 70 देशों ने इस मसले पर चीन का समर्थन किया है। अमेरिका और उसके करीबी देश ही फिलीपींस के समर्थन में हैं। मालूम हो कि फैसला आने के बाद भारत ने मसले के शांतिपूर्ण समाधान के साथ कोर्ट के फैसले के सम्मान की बात कही थी।
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इससे पहले दक्षिण चीन सागर (एससीएस) पर चीन के दावे को हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने खारिज कर दिया था। एसएससी पर एकाधिकार का दावा करने वाले चीन को संयुक्त राष्ट्र समर्थित अदालत ने ने कड़ी फटकार लगाई थी। बीते मंगलवार को अदालत ने चीन के दावों को तगड़ा झटका देते हुए कड़े शब्दों में कहा था कि एससीएस पर उसके एकाधिकार का कोई भी कानूनी आधार नहीं है। इस फैसले पर जहां फिलीपींस ने खुशी जताई थीवहीं, चीन ने फिर दोहराया था कि वह फैसले को नहीं मानेगा। इससे दक्षिण चीन सागर का विवाद और गहराने के आसार बढ़ गए हैं।
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गौरतलब है कि साल 2013 में फिलीपींस दक्षिण चीन सागर का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट लेकर गया था। उस पर सुनवाई करते हुए नीदरलैंड के हेग में परमानेंट कोर्ट ऑफ अर्बिर्टेशन (पीसीए) ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया था। इस अंतरराष्ट्रीय अदालत ने न सिर्फ चीन के एकाधिकार के दावे को नकारा बल्कि उसे दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने का दोषी भी पाया।

भारत के लिए भी अहम है यह फैसला

Chinese State Media Claims India Supports Beijing On South China Sea

पीसीए ने कहा, था कि ‘चीनी मछुआरों ने एससीएस के समुद्र में मौजूद लुप्त होने की कगार पर खड़े समुद्री जीवों का बड़े स्तर पर शिकार किया, लेकिन चीनी सरकार ने इन्हें रोकने की बजाय यहां की चट्टानों को नुकसान पहुंचाया, जो कि अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

न्यायालय ने यह भी साफ था किया कि ऐतिहासिक दृष्टि से चीन के अलावा अन्य क्षेत्रीय देशों ने भी एससीएस को इस्तेमाल किया है, लेकिन इस पर बीजिंग की तरफ से कभी एकाधिकार नहीं जताया गया था। अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले पर जहां फिलीपींस ने खुशी जताई है।

चीन ने नहीं माना है फैसला
चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस निर्णय को मानने से इनकार कर दिया है। उसने कहा था कि पीसीए को उसके आंतरिक मामलों को लेकर फैसला देने का कोई हक नहीं है। चीन ने कहा था कि उसका इससे कोई सरोकार नहीं है और वह फैसले से जुड़े किसी भी दस्तावेज को नहीं लेगा।

भारत के लिए भी अहम है यह फैसला
दक्षिण चीन सागर को लेकर आया अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला भारत के लिए भी काफी अहम है। दरअसल समुद्र के रास्ते होने वाले भारत के कुल व्यापार का करीब 55 फीसदी इसी इलाके से होता है। ऐसे में यहां पर उपजे तनाव से भारत के समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है।

दक्षिण चीन सागर को लेकर आए अंतरराष्ट्रीय फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक भारत सरकार के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।

इसके अलावा अगर किसी तरह चीन पूरे क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब हो जाता है, तो भारत के व्यापारिक जहाजों का  आवागमन भी प्रभावित होगा। चीन पहले से ही वियतनाम और भारत सरकार के बीच हुए तेल और गैस के समझौते का विरोध कर चुका है। 

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