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Hindi News ›   World ›   China ›   Chinese Foreign Minister remark over Doklam before ahead of the India China talks

दिल्ली में आज मिलेंगे डोभाल और चीनी NSA, डोकलाम के बाद सीमा मसले पर होगी बातचीत

Wed, 20 Dec 2017 08:40 AM IST
एजेंसी/ बीजिंग 
एजेंसी/ बीजिंग  Updated Wed, 20 Dec 2017 08:40 AM IST
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 Chinese Foreign Minister remark over Doklam before ahead of the India China talks
Ajit Doval - फोटो : File Photo

चीन ने कहा है कि डोकलाम गतिरोध दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों का एक ‘बड़ा इम्तिहान’ था और भविष्य में इस तरह की स्थिति को टालने के लिए इससे सबक सीखा जाना चाहिए। 

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यह बयान भारत-चीन सीमा वार्ता का 20वां दौर शुरू होने से पहले आया है। नई दिल्ली में आज से होने वाली इस वार्ता में भारत की अगुवाई राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी दल का नेतृत्व वहां से स्टेट काउंसलर यांग जिएची करेंगे।
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चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को यहां कहा, विशेष प्रतिनिधियों की यह वार्ता 22 दिसंबर को नई दिल्ली में होगी। दोनों देशों के लिए इस वार्ता का खास महत्व है। दोकलम में 73 दिन चली तनातनी के बाद इस वार्ता का यह पहला दौर है। सिक्किम क्षेत्र में दोकलम गतिरोध 28 अगस्त को खत्म हुआ था।
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चुनयिंग ने कहा, विशेष प्रतिनिधियों की यह बैठक सीमा संबंधी मुद्दों पर बात करने का न केवल एक उच्च स्तरीय चैनल है बल्कि यह सामरिक संवाद का भी मंच है। यह दोनों पक्षों को अंतरराष्ट्रीय और बड़ी चिंता वाले क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर देता है।

डोकलम की घटना ने दोनों देशों का एक बड़ा इम्तिहान लिया

 Chinese Foreign Minister remark over Doklam before ahead of the India China talks

हुआ ने कहा, 2017 में भारत-चीन संबंधों का एक अच्छा दौर देखा गया लेकिन डोकलाम की घटना ने दोनों देशों का एक बड़ा इम्तिहान लिया। हमें इस घटना से यह सबक सीखना चाहिए कि भविष्य में इस तरह के वाकये को किस तरह टाला जा सकता है। हमें सीमा पर शांति एवं सौहार्द बनाए रखने और भारत-चीन संबंधों के बड़े परिप्रेक्ष्य को देखते हुए ऐतिहासिक परंपराओं का पालन करना चाहिए। यह दोनों देशों के हित में है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या डोकलाम गतिरोध का असर वार्ता पर पड़ा है, तो हुआ ने कहा, हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के भारत दौरे में भी यह मुद्दा उठा था। वह भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत गए थे।

इस बैठक से इतर वांग ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की। वांग की सुषमा से मुलाकात के दौरान भी डोकलाम का मुद्दा उठा था। सीमा विवादों को हल करने के प्रयासों के अलावा भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता में दोनों देशों के संबंध, राजनीतिक, सामरिक, आर्थिक और व्यापार से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
सीमा विवाद के हल को हो 

हो चुकी है 19 दौर की वार्ता 
भारत और चीन के बीच जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। इसका 220 किलोमीटर का हिस्सा सिक्किम में पड़ता है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के हल के लिए विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 19 दौर हो चुके हैं। 

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