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जब अरबों रुपया फंसा हो तो म्यांमार को क्यों नहीं समर्थन देगा चीन

Wed, 27 Sep 2017 11:27 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Wed, 27 Sep 2017 11:27 AM IST
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China will block all efforts to internationalize the Rohingya refugee crisis

चीन रोहिंग्या मामले को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं बनने देना चाहता। अंग्रेजी अखबार के मुताबिक चीन, म्यांमार के रखाइन प्रांत में 7.3 अरब डॉलर के निवेश में जुटा है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोहिंग्या का मामला और गंभीर हुआ तो चीन को व्यापारिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

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रखाइन में भारी हिंसा के बाद रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश में शरण ले रखी है। रोहिंग्या मसले की वजह से म्यांमार पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। अपने व्यापारिक हित के कारण चीन नहीं चाहता कि ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय बने। चीन म्यांमार का समर्थन कर रहा है। 
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सिंगापुर के राजारथनम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (RSIS) में चाइना प्रोग्राम के असोसिएट रिसर्च फेलो आइरिनी चेन ने बताया कि रखाइन के डीप सी पोर्ट में चीन 7.3 अरब डॉलर का इनवेस्टमेंट कर रहा है।

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वह इंडस्ट्रियल पार्क और इकॉनामिक जोन तैयार करना चाहता है। रॉयटर्स के मुताबिक चीन डीप सी पोर्ट में 70 से 85 फीसदी शेयर चाहता है। जिससे उसकी वन बेल्ट वन रोड योजना आगे बढ़ेगी और उसे बंगाल की खाड़ी से जोडे़गा। यही कारण है कि चीन म्यांमार का समर्थन कर रहा है।

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