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चीन की विकास दर भारत से कम, पर रक्षा बजट तीन गुना ज्यादा
एजेंसी, बीजिंग
Updated Mon, 05 Mar 2018 05:25 PM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
चीन ने लगातार दूसरे साल 1992 के मुकाबले अपनी विकास दर का लक्ष्य 6.5 रखा है जो भारत द्वारा दूसरी तिमाही के लिए 7.2 के मुकाबले 7.5 फीसदी के लक्ष्य से काफी कम है। लेकिन चीन का रक्षा बजट इस साल 8.1 फीसदी रखा गया है जो भारत के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है।
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चीन ने सोमवार को पेश बजट रिपोर्ट में इस साल का रक्षा बजट करीब 11 खरब युआन (175 अरब डॉलर) रखा है जो पिछले साल की अपेक्षा सात प्रतिशत अधिक है। यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
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चीन ने सोमवार से शुरू हो रहे 13वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के पहले सत्र में पेश होने से पहले मीडिया को दी रिपोर्ट में वर्ष 2018 के लिए अपनी आर्थिक विकास दर का लक्ष्य 6.5 फीसदी रखा है ताकि वह कर्ज को लेकर अपनी वित्तीय चिंताओं को कम करते हुए आर्थिक स्थिरता बरकरार रख सके।
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दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में चीन की आर्थिक विकास दर का कम रहना भले ही भारत के लिए तुलनात्मक रूप से एक राहत भरी खबर हो लेकिन चीन ने जिस तरह अपना रक्षा बजट बढ़ाया है वह पड़ोसी होने के नाते भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
चीन ने रक्षा बजट पर 175 डॉलर यानी 11 हजार 375 अरब रुपये से ज्यादा के खर्च का प्रावधान रखा है। पहली वार्षिक बैठक के प्रवक्ता झांग येसुई ने बताया कि देश का प्रति व्यक्ति सैन्य खर्च अन्य प्रमुख देशों की तुलना में कम है। उधर लंदन के थिंकटैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के मुताबिक चीन का पिछले साल का रक्षा बजट 151 अरब डॉलर था जो अमेरिका के 603 अरब डॉलर से कम था। भारत के मुकाबले रक्षा बजट तीन गुना अधिक होने पर चीन के आधिकारिक मीडिया ने कहा है कि इसमें सिर्फ इकाई अंक की मामूली वृद्धि की गई है।
पूर्व में किए कम खर्च की भरपाई है यह रक्षा बजट
चीन में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता झांग येसुई ने कहा कि अन्य प्रमुख देशों की तुलना में चीन का रक्षा बजट जीडीपी और राष्ट्रीय राजकोषीय व्यय का एक छोटा हिस्सा मात्र है।
उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि रक्षा बजट में वृद्धि पूर्व में किए गए कम सैन्य खर्च की भरपाई है जिसका इस्तेमाल उपकरणों के विकास और सैन्यकर्मियों की बेहतरी के लिए किया जाएगा। इसमें जमीनी स्तर पर तैनात टुकड़ियों के जीवन स्तर व प्रशिक्षण हालातों के और बेहतर बनाया जाना शामिल है।