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चीन अपनी ही घोषणा का भुगत रहा है खामियाजा?

Tue, 03 Jul 2018 11:26 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 03 Jul 2018 11:26 AM IST
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China is suffering due to its own announcement?

'मेड इन चाइना' सुनते ही लोगों के दिमाग में सस्ते और कामचलाऊ सामान की छवि उभरती है। अब चीन इस तस्वीर को बदलना चाहता है और वो मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। चीन इस प्रोजेक्ट के तहत तीन स्तरों पर काम कर रहा है। इसमें सबसे प्रमुख है चीन में बनने वाले सामान की गुणवत्ता में सुधार करना।

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2035 तक चीन दुनिया की बड़ी इंडस्ट्री में अपनी कंपनियों को स्थापित करना चाहता है। 2049 तक चीन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का बादशाह होना चाहता है और मेड इन चाइना 2025 का आख़िरी लक्ष्य यही है। इस प्रोजेक्ट के तहत 10 अहम सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित करना है। इसमें पैसेंजर जेट, रोबोट, सेटेलाइट, समुद्री इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल्स वाहन में युद्धस्तर पर काम होगा। इसके लिए चीन की सरकार आर्थिक मदद मुहैया कारएगी साथ ही रिसर्च पर जोर शोर से काम भी करेगी।
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मेड इन चाइना 2025 के तहत संस्थान और विश्वविद्यालय भी खोले जाएंगे। कई लोग चीन के इस प्रोजेक्ट को अमरीका के लिए चुनौती मान रहे हैं। अमरीका और चीन में अभी व्यापार के मोर्चे पर तनातनी की स्थिति है। अमरीका का कहना है कि चीन के साथ व्यापार रिश्ता एकतरफा है और उसे 2017 में 370 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। इसी तनातनी के बीच चीन के मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट की चर्चा जोर-शोर से हो रही है। चीन इस योजना के तहत अपनी इंडस्ट्री को अपग्रेड करने की रणनीति पर काम कर रहा है। क्या वाकई चीन इस योजना से दुनिया का बादशाह बन जाएगा और क्या यह अमरीका के लिए चुनौती है?
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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन का सिक्का

China is suffering due to its own announcement?

चीन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अमरीका को चुनौती देना चाहता है। अब तक चीन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में बुनियादी उपभोक्ता सामान- कपड़े, जूते और इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर रहा है। इन कम कीमत वाले सामान के बाजार में चीन आसानी से दूसरे विकासशील देश जैसे मेक्सिको, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और ताइवान का सामना करता रहा है। अब चीन इस दायरे को तोड़ना चाहता है। चीन अब हाइटेक इंडस्ट्रीज में अपना सिक्का जमाना चाहता है।
 
चीन की रणनीति : जापान और पूर्वी एशियाई देश दक्षिण कोरिया, ताइवान, हॉन्ग कॉन्ग और सिंगापुर भी इसी तरह की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ये सभी अपनी अर्थव्यवस्था में तेजी और मुनाफा कमाना चाहते हैं। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद चीन एक विकासशील देश है। चीन में औसत प्रति व्यक्ति आय 8000 डॉलर है जबकि अमरीका में 56,000 डॉलर है। हालांकि चीन ने गरीबी कम करने और आर्थिक वृद्धि हासिल करने में व्यापक सफलता पाई है।
 
मेड इन चाइना बनाम मेड इन अमरीका : चीन की चाहता है कि वो हर स्तर पर अमरीका को चुनौती दे। कहा जा रहा है कि इसी को देखते हुए ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड वॉर शुरू कर दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन के मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट को रोकने के लिए ही ट्रंप ने ट्रेड वॉर की रणनीति को आगे बढ़ाया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में मेड इन चाइना 2025 के तहत ज़्यादातर इंडस्ट्रीज बनने की प्रक्रिया में हैं। चीन एविएशन इंडस्ट्री के कारोबार को फैलाना चाहता है, लेकिन चीन को बोइंग के सामने खड़ा होने में सालों लग सकते हैं। बोइंग का सबसे बड़ा खरीदार अभी भी चीन ही है।
 

क्या अमरीका की तरफ से शुरू किया गया ट्रेड वॉर प्रभावी है?

China is suffering due to its own announcement?

वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार का कहना है कि ट्रंप की यह रणनीति लंबे समय तक चीन को रोककर नहीं रख सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की रणनीति में चीन की अमरीकी बाजार पर निर्भरता को लेकर बढ़ाचढ़ाकर अनुमान लगाया गया है। चीन अमरीका में निर्यात 18 फीसदी ही करता है जबकि 80 फीसदी से ज्यादा निर्यात वो दुनिया के बाकी देशों में करता है। एयरक्राफ्ट को उदाहरण के तौर पर लें तो पता चलता है कि चीन जल्द ही सिविल एविएशन का बड़ा बाजार बन जाएगा। चीन में प्लेन बनाने वाली कंपनियां पहले घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करेंगी। इसके बाद इनके टारगेट पर विकासशील देश होंगे और फिर वैश्विक बाजार।

'मेड इन चाइना 2025' पर सवाल : हालांकि चीन के मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट पर कई लोग सवाल भी खड़े कर रहे हैं। बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर चोंग वेई का कहना है कि मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट को चीन रोक दे और वो सामान्य गाइडलाइन्स के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अपग्रेड करे। चोंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि मेड इन चाइना 2025 एक साधारण गाइडलाइन्स के अलावा कुछ नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस स्कीम की घोषणा रूटीन काउंसिल बैठक में की गई थी न कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी या नेशनल पीपल्स कांग्रेस में इस पर कोई फैसला लिया था। 2015 में चीन के प्रधानमंत्री ली किकियांग ने 'मेड इन चाइना 2025' प्रोजेक्ट से पर्दा हटाया था। हालांकि चीन के ख़िलाफ राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से छेड़े गए ट्रेड वॉर का असर शेयर बाजार और वहां की मुद्रा पर साफ दिख रहा है। पिछले हफ्ते चीन का प्रमुख शेयर बाजार शंघाई स्टॉक कंपोजिट पिछले दो सालों में सबसे निचले स्तर पर चला गया। चीनी मुद्रा यूआन में भी पिछले दो हफ़्तों में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
 
 अमरीका और चीन आमने-सामने : अमरीकी डॉलर की तुलना में चीन की मुद्रा यूआन इस हफ़्ते पिछले छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ जून में शंघाई कंपोजिट के इंडेक्स में 10 फीसदी की गिरावट आई है। इस बीच रविवार को चीन के केंद्रीय बैंक ने कहा कि वो वित्तीय व्यवस्था में करीब 107 अरब डॉलर की रकम जारी करेगा ताकि बाजार में उत्साह बना रहे। चीन अपनी मुद्रा में यूआन में रणनीतिक तौर पर अवमूल्यन करता रहा है। हालांकि इस बार कहा जा रहा है कि अगर चीन ने यूआन का इस्तेमाल ट्रेड वॉर में हथियार की तरह किया तो उस पर ही भारी पड़ेगा।

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