चीन बोला, हां किया न्यूक्लियर का परीक्षण
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चीन के रक्षा मंत्रालय ने सुपरसोनिक न्यूक्लियर डिलिवरी व्हीकल के परीक्षण की पुष्टि कर दी है। अमेरिका ने चीन के इस कदम को दक्षिणी चीन के समुद्री क्षेत्र में तनाव लाने वाला करार दिया है। अमेरिका ने यहां तक कह दिया है कि चीन अब अपनी हदें पार कर रहा है।
चीन की पीपल लिबरेशन आर्मी ने पिछले 18 महीने के दौरान सुपरसोनिक न्यूक्लियर डिलिवरी व्हीकल का लगातार चौथी बार कामयाब परीक्षण किया है। चीन ने अपना चौथा टेस्ट रविवार को किया।
दक्षिणी चीन के मॉर्निंग पोस्ट ने चीनी मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि हमारे यहां वैज्ञानिक शोध और प्रयोग एक सामान्य बात है। इन परीक्षणों का मकसद किसी देश को या किसी खास का लक्ष्य बनाना नहीं है।
चीन ने पूरे विश्व के सामने नई चुनौती पेश कर दी
अखबार ने आगे लिखा है कि पर लेकिन सैन्य पर्यवेक्षकों का मानना है कि बार-बार परीक्षण करके पेइचिंग अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर जोर दे रहा है। यह इस क्षेत्र में चीन के सीमा विवाद में बढ़ती अमेरिकी दखलंदाजी का चीनी जवाब है।
गौरतलब है कि इस परीक्षण की खबर सबसे पहले देने वाली अमेरिकी वेबसाइट वॉशिंगटन फ्री बीकन ने दी थी। इस वेबसाइट ने अपने हवाले से लिखा है कि चीन का सुपरसोनिक न्यूक्लियर डिलिवरी व्हीकल उच्च तकनीक वाला रणनीतिक हथियार है जो न्यूक्लियर या पांरपरिक वारहेड अंतरिक्ष में भी ले जा सकता है।
चीन के प्रयोग इस प्रयोग के बाद एक बार फिर से नए हथियारों के प्रयोग की होड़ लग सकती है। एक तरह से चीन ने पूरे विश्व के सामने नई चुनौती पेश कर दी है। आगे देखना होगा कि चीन के इस प्रयोग के वैश्विक स्तर पर क्या प्रतिक्रिया मिलती है।