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बांग्लादेश में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए चीन करेगा 20 अरब डॉलर का निवेश

Sat, 15 Oct 2016 12:11 AM IST
एजेंसी/ ढाका
एजेंसी/ ढाका Updated Sat, 15 Oct 2016 12:11 AM IST
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China, Bangladesh ink 26 agreements after Xi-Hasina talks
हाल ही में भारत ने बांग्लादेश को 2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था, लेकिन पड़ोसी देशों से भारत के बढ़ते रिश्तों पर चीन ने अपनी नजरें गढ़ा दी हैं। इसी मकसद से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को बांग्लादेश में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को मंज़ूरी दे दी। उन्होंने बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ एक मुलाकात में ऋण और निवेश डील समेत करीब 40 समझौतों पर मुहर लगाई। बांग्लादेश को यह अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है, जो उसे ऊर्जा संयंत्र, बंदरगाह और रेलवे निर्माण में मदद करेगा।
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पिछले 30 साल में किसी चीनी राष्ट्रपति का यह पहला बांग्लादेश दौरा था। हसीना से मुलाकात के बाद शी जिनपिंग ने कहा कि हम दोनों चीन और बांग्लादेश के संबंधों को बढ़ाने के इच्छुक हैं। इसके लिए रणनीतिक भागीदारी में सक्रिय सहयोग निभाने पर दोनों के बीच आपसी सहमति बनी। चीन और बांग्लादेश के बीच इस नई ऐतिहासिक शुरूआत की जानकारी देते हुए विदेश सचिव साहिदुल हक ने बताया कि देश के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों पर आपसी सहमति बनी है। हालांकि उन्होंने चीन कितना निवेश की जानकारी नहीं दी, लेकिन माना जा रहा है कि यह राशि 20 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। 
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मुलाकात के बाद शेख हसीना ने कहा कि वे बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यांमार के बीच आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण को समर्थन देंगी ताकि बिजली, ऊर्जा, तकनीकी, कृषि, परिवहन, जल संसाधन आदि क्षेत्र में विकास के रास्ते खुल सकें। चीन भी बांग्लादेश के साथ एक ऐसे मित्र और सहभागी के रूप में काम करने के लिए तैयार है जो एक दूसरे पर भरोसा करते हों। हसीना ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत काफी उपयोगी रही जिसमें क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुधारने जैसे मुद्दे शामिल रहे। 
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भारत और चीन के बीच शुरू हुई वर्चस्व की होड़

China, Bangladesh ink 26 agreements after Xi-Hasina talks
चीन द्वारा यह सब ऐसे समय में किया जा रहा है, जब भारत भी बांग्लादेश को प्रभाव क्षेत्र मानते हुए वहां अपना निवेश बढ़ा रहा है। भारत की ही मदद से जापान भी बांग्लादेश से जुड़ गया है, और उसने बंदरगाह निर्माण तथा ऊर्जा कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए कम ब्याज पर बांग्लादेश को रकम दी है। इस बीच चीन भी अपने निजी स्वार्थों को लेकर बांग्लादेश में बड़े निवेश के साथ कूद पड़ा है। इस तरह 16 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश में वर्चस्व की होड़ शुरू हो गई है।

भारत के पड़ोसियों से संबंध बनाने की चीनी रणनीति
चीन चाहता है कि वह पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत न होने दे। दरअसल, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी श्रीलंका, नेपाल तथा बांग्लादेश से संबंध मजबूत करने में जुटे हैं। पिछले साल ही मोदी ने बांग्लादेश के लिए दो अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज की घोषणा की थी। हालांकि शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ में साउथ एशिया स्टडीज़ के निदेशक झाओ गानचेंग ने कहा कि मुझे नहीं लगता, बांग्लादेश में भारत और चीन के बीच कोई खेल जारी है।

चीन की पहल से भारत को चिंता
बांग्लादेश ने शी जिनपिंग की ‘एक बेल्ट, एक सड़क’ पहल का समर्थन किया है, ताकि एशिया और यूरोप में व्यापार व आवागमन सुलभ हो सके। इसे बांग्लादेश भले ही विकास का अवसर मान रहा है, लेकिन भारत को इस योजना पर कुछ शंका है, और इस बात की चिंता भी है कि यह एशिया में शक्ति संतुलन को चीन के पक्ष में झुकाने की कोशिश है। भारत ने चीन के आर्थिक गलियारे के प्रस्ताव को लेकर भी उत्सुकता नहीं दिखाई। भारत मानता है कि यह सब भारत को कमजोर करने के लिए है।
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