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विरोधाभासों के बीच बीजिंग में मिली दो महाशक्तियां, कई विवादित मुद्दों पर भी होगी बातचीत

Thu, 09 Nov 2017 09:04 AM IST
टीम डिजिटल अमर उजाला
टीम डिजिटल अमर उजाला Updated Thu, 09 Nov 2017 09:04 AM IST
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china and america meeting held in beijing despite of dispute between the both nations

पूंजीपति देश अमेरिका के राष्ट्रपति का कम्युनिस्ट मुल्क चीन में स्वागत होना भले ही दुनिया की समझ से परे हो, लेकिन बीजिंग के ऐतिहासिक पैलेस म्यूजियम चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग व उनकी पत्नी पेंग लियुआन द्वारा ट्रंप और मिलानिया के जोरदार स्वागत का गवाह बना। हालांकि दोनों देशों के बीच कई विरोधाभासी मुद्दे हैं जिन पर दो महाशक्तियों के बीच चर्चा होनी है लेकिन दोनों के बीच समझौतों की रूपरेखा भी तय हो चुकी है। इनमें बड़े कारोबारी समझौते और कुछ वैश्विक कूटनीति से जुड़े मसले शामिल हैं। 

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चीन के फारबिडन शहर में दोनों नेताओं ने भले ही चाय की चुस्कियां लेते हुए अपने एजेंडे की शुरूआती चर्चा मीठे अंदाज में की हो, लेकिन दुनिया की निगाहें उन विवादास्पद मसलों पर जमी हुई हैं जो पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच स्वाभाविक खाई बनाए हुए हैं। इनमें अमेरिका के भीतर चीन का कारोबार, चीन में अमेरिकी व्यवसायियों को स्वतंत्र ट्रेड सुविधा और उत्तरी कोरिया की परमाणु नीति पर दबाव बनाना शामिल है। इनके अलावा हिंद-प्रशांत महासागर और दक्षिण सागर में कारोबारी रास्तों की मौजूदगी पर अधिकार को लेकर भी दोनों महाशक्तियों के बीच कुछ समझौतों की उम्मीद की जा रही हैं, जो बेहद ही संवेदनशील और विवादास्पद हैं।
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पढ़ें: अमेरिका के साथ नये रिश्ते तलाश रहा चीन, ट्रंप के स्वागत की तैयारी में जुटा
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ट्रंप यहां तीन दिन की यात्रा पर हैं और उनके साथ बोइंग, गोल्डमैन साक्स, वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक और क्वालकॉम जैसी दिग्गज कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी इन्हीं समझौतों को लेकर मौजूद हैं। इससे पहले गत सप्ताह फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग, एप्पल के टिम कुक और माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला भी शी जिनपिंग के साथ दिखाई दिए।

इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका किसी भी तरह चीन के बाजार में घुसना चाहता है, जबकि अपने देश में चीनी कंपनियों के लिए स्वतंत्र कारोबारी रास्ते रोकना चाहता है। इसलिए चीन विरोधी रुख के बावजूद ट्रंप पर चीन के साथ समझौतों के लिए दबाव है। जबकि चीन पर भी दुनिया में ओबोर पहल और कारोबार बढ़ाने का दबाव है। इसलिए दोनों के बीच समझौते महत्वपूर्ण हैं।

बेमेल है दोनों नेताओं की जोड़ी

china and america meeting held in beijing despite of dispute between the both nations

‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा है कि शी जिनपिंग और ट्रंप को भले ही एक बेमेल जोड़ी के रूप में देखा जाता हो, लेकिन ट्रंप के इस दौरे को चीन ने सरकारी यात्रा से बढ़कर ‘स्टेट विजिट प्लस’ का नाम दिया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि दोनों अपनी राह साथ मिलकर तैयार करेंगे या दोनों में से किसी एक को इसका मूल्य चुकाना होगा।

चूंकि दोनों के बीच विरोधाभास अधिक हैं, क्योंकि दोनों ही खुद को अपने-अपने देश का मसीहा मानते हैं और दोनों ही खुद पर ज्यादा भरोसा रखते हैं। ट्रंप अमेरिका को महान बनाने की बात करते हैं और शी जिनपिंग चीन के कायापलट की बात कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने दो बड़ी महाशक्तियों की इस जोड़ी को बेमेल करार दिया है।

चीन पर है भारत, जापान व यूएस के नए समीकरणों को लेकर दबाव

एक तरफ महाशक्तियों की इस मुलाकात में अमेरिका दबाव में है तो दूसरी तरफ चीन पर सबसे बड़ा दबाव भारत, जापान और अमेरिका को लेकर बनने वाले नये समीकरणों का है। जापान ने चीन के वन बेल्ट, वन रोड वाले कदम के विरोध में नया सिल्क रोड प्लान तैयार करने का प्रस्ताव चारों देशों के सामने रखा है। भारत चूंकि चीन का पड़ोसी है और जापान, अमेरिका यदि भारत के साथ मिलकर कोई योजना शुरू कर देते हैं तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा चीन को ही उठाना पड़ेगा। इसे लेकर चीन दबाव में है। इसके अलावा विवादित दक्षिण और पूर्वी चीन सागर को लेकर चीन के दावों पर भी अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बता चुका है। 

ट्रंप ने उत्तर कोरियाई तानाशाह को ‘सद्मार्ग’ पर लाने की पेशकश की

सियोल। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आज उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन को एक बेहतर भविष्य की पेशकश करते हुए कहा कि भावी दिशा का यह महत्वपूर्ण रास्ता परमाणु महत्वाकांक्षाओं से ऊपर है। ट्रंप ने दक्षिण कोरियाई संसद को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया जो हथियार बना रहा है वह उसे सुरक्षित नहीं बना रहे हैं, बल्कि इससे किम अपने शासन को एक बड़े खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अंधकार से भरे रास्ते का हर कदम आपके सामने खतरा बढ़ा रहा है। ट्रंप ने प्योंगयांग की क्रूर तानाशाह के रूप में निंदा की। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया को लेकर किम जोंग-उन के दादा ने यह कल्पना नहीं की थी। हम एक बेहतर भविष्य की दिशा में सद्मार्ग की पेशकश करेंगे।

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