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चीन ने तिब्बत सीमा सुरक्षा के नियम किए सख्त

Wed, 04 Jan 2017 01:04 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ बीजिंग 
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ बीजिंग  Updated Wed, 04 Jan 2017 01:04 AM IST
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 Border rules in Tibet tightens by China to Combat Separatism
चीन ने तिब्बत के सीमा क्षेत्र में आतंकवाद और अलगाववादियों खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा नियमों को और भी सख्त कर दिया है। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध लड़ चुके चीन ने यह कदम तिब्बत से लगी भारतीय सीमा पर इसलिए उठाया है ताकि तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाईलामा की अरुणाचल प्रदेश में होने वाली संभावित यात्रा को रोका जा सके।
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चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा को एक खतरनाक अलगाववादी बताते हुए कहा कि भविष्य में तिब्बत के भीतर नए विवादों को देखते हुए आतंकी गतिविधियों से लड़ने के लिए एक कानूनी आधार बनाया है। इससे पहले यहां जमीन और व्यापार से संबंधित कानून हल्का था। यह सख्त कानून पुलिस को सीमा सुरक्षा का अधिक अधिकार देगा। 
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चीन के मुताबिक तिब्बत में अलगाववादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के साथ-साथ घुसपैठ, अवैध प्रवास व आतंकवाद रोकने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। उल्लेखनीय है कि शांति का नोबल पुरस्कार हासिल कर चुके दलाई लामा चाहते हैं कि तिब्बत को स्वायत्तता मिली चाहिए। उन्होंने वर्ष 1959 में भारत की शरण ली है।
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चीन की सेना तिब्बती क्षेत्र में एक मजबूत लोहे जैसी दीवार बना चुकी है

 Border rules in Tibet tightens by China to Combat Separatism
मानवाधिकार से जुड़े संगठनों का कहना है कि चीन द्वारा तिब्बत की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं को लगातार रौंदा जा रहा है। जबकि बीजिंग अक्सर यहां पर शांति के प्रयासों के नाम पर 1950 से ऐसा ही करता आ रहा है। हिमालयी क्षेत्र की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया वु यिंग्जी ने कहा कि - ‘चीन की सेना तिब्बती क्षेत्र में एक मजबूत लोहे जैसी दीवार बना चुकी है।’

वु ने कहा कि सुशासन के लिए हमें सबसे पहले तिब्बत की सीमाएं सुरक्षित करना पड़ेंगी। हालांकि तिब्बत अकादमी ऑफ सोशल साइंस के उपनिदेशक ने माना है कि फिलहाल क्षेत्र में आतंकवाद का कोई गंभीर खतरा नहीं है।

तिब्बत के बहाने चीन की चाल

चीन ने तिब्बत में सीमा सुरक्षा के नाम पर कड़ा कानून बनाकर वहां पर पुलिस को असीमित अधिकार भले ही दे दिए हैं लेकिन इसके पीछे चीन का मकसद जिनपिंग की वन चायना पॉलिसी एक बड़ा कारण है। इस नीति के तहत चीन दक्षिण एशिया में नेपाल और बांग्लादेश को जोड़ते हुए वहां व्यापार के मकसद से रेल व सड़क मार्ग बनाना चाहता है। पिछले माह ही चीन ने तिब्बत और नेपाल को जोड़ते हुए करीब 3 करोड़ की रेल व कार्गो सेवा लांच की है। इस निवेश का मकसद चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

पुलिस को मिलेंगी असीमित शक्तियां

सुरक्षा एजेंसियों को अत्यधिक शक्ति देने वाले चीन के आतंकवाद रोधी कानून में तिब्बत की पुलिस को भी असीमित अधिकार मिल सकेंगे। यह कानून पुलिस को यहां कार्यरत कंपनियों में इंस्क्रिप्शन जैसी संवेदनशील जानकारियां भी सरकार को देने के लिए बाध्य करेगा। 

इस कानून के तहत विदेशों में आतंक रोधी अभियानों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के भाग लेने को भी वैध बना दिया गया है। इस कारण आतंकवाद के बढ़ते खतरे से निपटने के उपायों के प्रति लोगों को आगाह करने के नाम पर पुलिस व सेना अब तिब्बत में और अधिक मनमानी कर सकती हैं।
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