Nepal: नेपाल में प्रभाव बढ़ाने की होड़ में चीन, चला 80 अरब रुपये का दांव
विश्लेषकों के मुताबिक अब तक मिली जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह रकम उस सहायता रकम का हिस्सा भी है, जिसे देने की घोषणा अक्तूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी नेपाल यात्रा के दौरान की थी। तब शी ने एलान किया था कि अगले दो साल में चीन नेपाल को 65 अरब रुपये (3.5 बिलियन युवान) देगा...
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चीन ने नेपाल पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए नया दांव चला है। इससे यहां यह चर्चा शुरू हो गई है कि पुष्प कमल दहल के प्रधानमंत्री बनने से चीन को नेपाल में स्थितियां अपनी तरफ झुकती महसूस हो रही हैं। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के शासनकाल में नेपाल में अमेरिकी प्रभाव बढ़ने के साफ संकेत मिल रहे थे।
बीते सप्ताहांत नेपाल के वित्त मंत्री प्रकाश शरण महत के कार्यालय ने एक बयान जारी किया। उसमें बताया गया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण संबंधी परियोजनाओं पर खर्च के लिए नेपाल को चीन 80 अरब (नेपाली) रुपये देगा। इस बात पर सहमति महत और काठमांडू स्थित चीन के राजदूत चेन सोंग के बीच बातचीत में बनी। हालांकि नेपाल के वित्त और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि यह कोई नई सहायता नहीं है। चीन यह मदद देने का वादा साल 2008 से करता रहा है। अब उसने यह रकम जारी करने का फैसला किया है।
विश्लेषकों के मुताबिक अब तक मिली जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह रकम उस सहायता रकम का हिस्सा भी है, जिसे देने की घोषणा अक्तूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी नेपाल यात्रा के दौरान की थी। तब शी ने एलान किया था कि अगले दो साल में चीन नेपाल को 65 अरब रुपये (3.5 बिलियन युवान) देगा। कोरोना महामारी फैल जाने के कारण तब चीन यह रकम नहीं दे सका था।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘जैसे ही राष्ट्रपति शी नेपाल से वापस गए, कोरोना महामारी फैल गई। इसलिए चीनी राष्ट्रपति की घोषणा के तहत सहायता पाने के लिए हम बातचीत को आगे नहीं बढ़ा पाए। अब यह काम नेपाल के वित्त मंत्रालय का है कि वह इस बारे में चीन से बात करे और मिलने वाली रकम का उपयोग करे।’
आरोप है कि नेपाल की सरकारें चीन से मिलने वाली सहायता में प्राथमिकता तय करने में अब तक नाकाम रही हैं। चीन में नेपाल के राजदूत रह चुके लीला मणि पौडयाल ने कहा है- ‘हम परियोजना का खाका तैयार करने, उनके बारे में चीन से बातचीत करने और निवेश लाने में नाकाम रहे हैं। हम परियोजना के बारे में अपने प्रस्ताव नहीं रख पाए हैं।’
अब नेपाल के वित्त मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग समन्वय प्रभाग के प्रमुख कृष्ण नेपाल ने आश्वासन दिया है कि नेपाल की वर्तमान सरकार जल्द ही चीन के साथ परियोजनाओं पर बातचीत शुरू करेगी। मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चीन अभी जो रकम देने पर सहमत हुआ है, वह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के हिस्सा नहीं है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक देउबा सरकार के समय नेपाल ने अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से 50 करोड़ डॉलर की सहायता स्वीकार की थी। उसके बाद अमेरिकी अधिकारियों की नेपाल यात्रा का सिलसिला चला और नेपाल अमेरिका की तरफ झुकता दिखा। इससे चीन परेशान था। अब उसने एक बड़ी सहायता का एलान कर पलड़ा फिर अपने पक्ष में झुकाने की कोशिश की है।