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ड्रैगन की तानाशाही: तिब्बतियों की धार्मिक गतिविधियों पर चीन ने रोक लगानी शुरू की
Mon, 29 Nov 2021 05:31 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, अम्दो।
एजेंसी, अम्दो।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 29 Nov 2021 05:31 AM IST
सार
चीनी अधिकारी तिब्बतियों के घरों से उनके निजी पूजा स्थल हटाते हुए वेदियां उठा ले जा रहे हैं, उनकी पवित्रता नष्ट कर रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : Social media
विस्तार
तिब्बत के लोगों को पूरी तरह अपना गुलाम बनाए रखने के लिए चीन ने अब यहां धार्मिक पाबंदियों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। नई पाबंदियां तिब्बत के अम्दो राज्य में लागू हुई हैं। उसने कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े सभी सदस्यों व काडर के अलावा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
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साथ ही कहा है कि जो भी सरकारी कर्मचारी या पदाधिकारी ऐसा करता पाया गया तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। यही नहीं, अन्य तिब्बतियों को सरकार से मिलने वाली विभिन्न सुविधाएं और सब्सिडी भी बंद कर दी जाएंगी।
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तिब्बतियों को कोरा (बौद्ध पूजा पद्धति में परिक्रमा), माला पहनने, यहां तक की डिजिटल प्रार्थना व अन्य धार्मिक रस्में निभाने से भी रोक दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले अक्तूबर में चीन ने गोलोग प्रांत में ऐसी ही पाबंदियां लगाई थीं।
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70 साल से कायम अनाधिकृत शासन...
तिब्बत पर 1950 के दशक में चीन ने कब्जा करना शुरू कर दिया था। 1959 में तिब्बतियों के विद्रोह को चीन ने कुचल दिया। इसी दौरान 14वें दलाई लामा ने भारत पलायन किया। बौद्ध तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्म गुरु होने के नाते उन्हाेंने निर्वासित सरकार भी बनवाई।
उद्देश्य : तिब्बती पहचान व राष्ट्रीयता नष्ट करना...
सख्ती के पीछे तिब्बतियों के दिलों से उनकी सांस्कृतिक पहचान भुलाना और राष्ट्रीयता की भावना को नष्ट करना है। सूत्रों के अनुसार जो तिब्बत सरकारी सेवा में आ रहे हैं या कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ रहे हैं, उन्हें पहले निशाने पर लिया है। बाकी नागरिकों पर भी सब्सिडी रोकने के तरीके अपनाए जा रहे हैं।