चीन ने ठुकराया हथियार नियंत्रण संधि में शामिल होने का प्रस्ताव, कहा- कोई इरादा नहीं
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अमेरिका और रूस के बीच 2021 में खत्म होने वाली हथियार नियंत्रण संधि को लेकर चल रही समझौता वार्ता में चीन को शामिल करने का प्रस्ताव चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर ठुकरा दिया है। इससे संभावित त्रिपक्षीय हथियार नियंत्रण वार्ता (न्यू स्टार्ट संधि) का खटाई में पड़ना तय है। त्रिपक्षीय वार्ता प्रस्ताव पर चीन ने कहा है कि उसका इसमें शामिल होने का कोई इरादा नहीं है।
बता दें कि अमेरिका ने चीन को यह कहते हुए इस वार्ता में शामिल होने को कहा था कि न्यू स्टार्ट संधि के तहत दुनिया में हथियारों की होड़ पर नियंत्रण पाने के दायरे में मौजूदा हथियार भी शामिल करने चाहिए जो चीन बना रहा है। इस प्रस्ताव पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, चीन अपने परमाणु बल को हमेशा न्यूनतम स्तर पर रखता है जो अमेरिका और रूस ती तुलना में कम है।
ऐसे में त्रिपक्षीय हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का उसका कोई इरादा नहीं है। पिछले साल अमेरिका ने 1987 में रूस के साथ हुई इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (आईएनएफ) संधि से वापसी के दो कारण गिनाए थे जिनमें पहला रूस द्वारा नए हथियारों का विकास था और दूसरा चीन को इस दायरे में नहीं लाना रहा था। चीन ने कहा, अमेरिका-रूस के बीच हथियार नियंत्रण वार्ता में उसका शामिल होना उचित नहीं है।
दस वर्षों में एटमी ताकत दोगुनी करना चाहता है चीन
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन आगामी दस वर्षों में अपने एटमी हथियार शस्त्रगार का आकार दोगुना करने पर आमादा है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जेम्म एच. एंडरसम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में रूस और अमेरिका के साथ हथियार नियंत्रण संधि में चीन का शामिल होना जरूरी है।
चीन की तैयारी
चीन अपने वॉक हैड में लगातार नए हथियार जोड़ता जा रहा है। चीन फिलहाल डीएफ-31एजी और डीएफ-41 अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइलों के नए स्वरूप का विकास कर रहा है। उसका डीएफ-17 सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइल को भी परमाणु उपकरण ले जाने में सक्षम है। यही नहीं, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (पीएलएआरएफ) परमाणु हथियार संख्या भी अमेरिका और रूस से कम नहीं है।
बहुपक्षीय वार्ता पर है भरोसा : चीनी प्रवक्ता
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने अड़ते हुए कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ काम करना जारी रखेगा। परमाणु हथियारों वाले पांच देशों में चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन शामिल हैं और उनके बीच परमाणु हथियारों के लिए अप्रसार (एनपीटी) संधि है। ऐसे में चीन बहुपक्षीय वार्ता को प्रोत्साहित करेगा, लेकिन द्विपक्षीय अथवा त्रिपक्षीय समझौते को नहीं।