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US-China Row: दक्षिण चीन सागर की विवादित चौकियों पर फिर चीन का दावा, सैन्यीकरण से अमेरिका खफा
Fri, 06 Jan 2023 11:26 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 06 Jan 2023 11:26 AM IST
सार
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि चीन के इस प्रयासे से क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को खतरा है। चीन गैरकानूनी ढंग से दक्षिण चीन सागर में अपना एजेंडा लागू करना चाहता है। उसके भड़काऊ कार्यों, जबरदस्ती और डराने-धमकाने की मंशा से क्षेत्र की शांति और सुरक्षा कमजोर होगी।
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दक्षिण चीन सागर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चीन ने दक्षिण चीन सागर की विवादित चौकियों पर चीन ने एक बार फिर दावा करने के साथ सैन्यीकरण का प्रयास शुरू किया है। चीन के भड़काऊ कदमों को लेकर अमेरिका ने गुरुवार को गंभीर चिंता प्रकट की है।
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अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि चीन के इस प्रयासे से क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को खतरा है। चीन गैरकानूनी ढंग से दक्षिण चीन सागर में अपना एजेंडा लागू करना चाहता है। इस समुद्री इलाके में उसके भड़काऊ कार्यों, जबरदस्ती और डराने-धमकाने की मंशा से क्षेत्र की शांति और सुरक्षा कमजोर होगी।
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चीन ने कोई कानूनी आधार पेश नहीं किया : अमेरिका
नेड प्राइस ने कहा कि बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर पर दावों के लिए कोई ठोस व सुसंगत कानूनी आधार पेश नहीं किया है। दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियां रोजमर्रा की चर्चा का विषय हैं। इनमें अमेरिका के सहयोगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझेदार देशों की भागीदारी और चीन अधिकारी भी शामिल होते हैं। अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में अपने विशाल और गैरकानूनी दावों के नाम पर उसकी गतिविधियों को हमने देखा है।
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क्षेत्र पर सभी देशों के अधिकार
वह समुद्री आवाजाही के अधिकारों और क्षेत्र की स्वतंत्रता में दखल दे रहा है। ये अधिकार सभी देशों के हैं। हम चीन के गैरकानूनी समुद्री दावों को खारिज करते हैं। चीन को अपने दावों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप हल करने के लिए कह रहे हैं। नेड प्राइस ने कहा कि चीन को 12 जुलाई, 2016 के मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले का पालन करना चाहिए। उसे दक्षिण चीन सागर में गैरकानूनी और उत्तेजक कार्रवाई को रोकना चाहिए।
2010 से चीन कर रहा हथियाने की कोशिश
चीन 2010 से दक्षिण चीन सागर के निर्जन द्वीपों को हथियाने की कोशिश कर रहा है। वह इन्हें यूएनसीएलओएस UNCLOS के तहत लाने के लिए कृत्रिम द्वीपों में परिवर्तित कर रहा है। चीन अपनी वहां की चट्टानों के आकार और संरचना को बदल रहा है। उसने वहां हवाई पट्टी भी बना ली है। अमेरिका कृत्रिम द्वीपों के निर्माण की कड़ी आलोचना करता है। वह चीन की इन हरकतों को 'रेत की दीवार' की संज्ञा देता है।
इन देशों का भी है दावा
चीन पैरासेल द्वीप समूह सहित लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है। वहीं, ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। इस इलाके के बारे में कहा जाता है कि यहां तेल और गैस के बहुमूल्य भंडार हैं।