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चीन में ईसाई निशाने पर: यीशु की फोटो हटाकर जिनपिंग की तस्वीर लगाने का आदेश

Thu, 23 Jul 2020 12:28 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Tanuja Yadav Updated Thu, 23 Jul 2020 12:28 PM IST
सार

  • चीन में 40 करोड़ बौद्ध-ताओ, 6.7 करोड़ ईसाई, डेढ़ करोड़ मुस्लिम
  • तस्वीर चीन के योनगिजा शहर की है। यहां क्रेन से चर्च पर स्थापित क्रॉस हटाया गया

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China orders Christians to remove Jesus photograph from home and put communist leaders photographs
मुस्लिम के बाद ईसाई समुदाय पर चीनी तानाशाही फरमान जारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उइगर मुस्लिमों के नरसंहार को लेकर दुनिया भर में आलोचना झेल रही चीन की कम्युनिस्ट सरकार के निशाने पर अभी शायद समुदाय भी आ गया है। चीन के कई प्रांतों में कथित तौर पर ईसाई समुदाय के लोगों को आदेश दिया गया है कि वे अपने घरों में लगी जीसस क्राइस्ट की तस्वीरें, मूर्तियां और क्रॉस फौरन हटाएं और इनकी जगह कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की फोटो लगाएं।

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसाई समुदाय के लोगों को कम्युनिस्ट पार्टी की लोकल कमेटी ने कई प्रांतों में ऐसे आदेश दिए हैं। लोगों से कहा गया है कि इन धार्मिक प्रतीकों को हटाकर वे कम्युनिस्ट पार्टी के फाउंडर माओत्से तुंग और वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीरें लगाएं। इसके अलावा बीते दिनों एक अभियान चलाकर चीन के चार राज्यों में सैकड़ों चर्चों के बाहर लगे धार्मिक प्रतीक चिन्हों को हटाया जा चुका है।
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इसके पीछे तर्क दिया गया था की समानता स्थापित करने के लिए इमारतों के जरिए किसी धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए। चीन के अन्शुई, जियांग्सु, हेबई और झेजियांग में मौजूद चर्चों के बाहर लगे सभी धार्मिक प्रतीकों और तस्वीरों को जबरन हटवा दिया गया है। ऐसी खबरें भी हैं कि जहां लोगों ने इस कदम का विरोध किया वहां सख्ती से काम लिया।
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चर्चों के बाद अब जिनपिंग सरकार ने ईसाई समुदाय के लोगों के घरों से भी इन धार्मिक प्रतीकों को हटाने का फरमान सुना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन किसी तरह की धार्मिक गतिविधियों को मंजूरी नहीं देना चाहता। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकार नहीं चाहती कि उनके नेताओं के अलावा लोग किसी भी और शक्ति पर भरोसा करें। रिपोर्ट में हुआनान प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा क्रॉस तोड़े जाने के बाद विरोध में इकट्ठे हुए लोगों का भी जिक्र है।

हजारों चर्चाओं में सरकार ने की तोड़फोड़ 
रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन पहले से ही धार्मिक आजादी को कुचलने के लिए बदनाम है। इस आदेश के पहले ही सरकार ने हुबेई, जियांग्सु, झेजियांग, अन्शुई समेत कई राज्यों में स्थित हजारों चर्चाओं से जीसस की तस्वीरें और क्रॉस को हटवा दिया है। ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि चीनी सरकार के आदेश पर कई चर्चों में तोड़फोड़ भी की गई है। चीन में ईसाइयों की आबादी लगभग 7 करोड़ के आसपास है।


धार्मिक स्थलों में प्रवेश पर ट्रैक्स
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 8.5 करोड़ कार्यकर्ता हैं। उन्हें सरकार की सख्त चेतावनी है कि वे किसी धर्म का पालन नहीं करें। चीन में करीब 40 करोड़ बौद्ध-ताओ, 6.7 करोड़ ईसाई और डेढ़ करोड़ मुस्लिम हैं। इन्हें धार्मिक स्थलों के बाहर ही प्रार्थना करने की अनुमति है। सरकार यहां आने वाले श्रद्धालुओं से टैक्स लेती है। शिनजियांग प्रांत में जेल सरीखी कई इमारतें हैं। यहां हजारों उइगर मुसलमानों को कैद कर रखा गया है। सरकार ने देश में इस्लाम को कम्युनिस्ट पार्टी के एजेंडे पर चलाने के लिए पंचवर्षीय योजना भी बनाई है।

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