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चीन ने अब अरुणाचल से सटी पूर्वी भूटान की जमीन पर गड़ाईं नजरें

Mon, 06 Jul 2020 03:07 AM IST
अवधेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, थिंपू/बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, थिंपू/बीजिंग Published by: अवधेश कुमार Updated Mon, 06 Jul 2020 03:07 AM IST
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China now eyes on eastern Bhutan land adjacent to Arunachal
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
अपने पड़ोसियों से सीमा पर मोर्चे खोलने वाले चीन ने अब पहली बार माना है कि उसका भूटान के साथ पूर्वी इलाके में सीमा विवाद है। चीन की यह स्वीकारोक्ति भारत के लिए इसलिए मायने रखती है कि भूटान की पूर्वी सीमा अरुणाचल प्रदेश से लगती है, जिस पर विस्तारवादी चीन अपना नापाक दावा जताता रहा है। चीन का कहना है कि उसका भूटान के साथ कभी सीमा विवाद सुलझा ही नहीं है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के विदेश मंत्रालय ने मंदारिन में बयान जारी कर कहा कि भूटान के साथ उसका अरसे से पूर्वी, मध्य और पश्चिमी इलाके में सीमा विवाद है। भारत की ओर इशारा करते हुए चालाक चीन ने कहा है कि किसी तीसरे पक्ष को चीन-भूटान सीमा विवाद में उंगली नहीं उठानी चाहिए। 
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वहीं, भूटान के सूत्रों के मुताबिक चीन और भूटान के बीच पूर्वी इलाके में कभी भी सीमा विवाद को लेकर बातचीत नहीं हुई थी। दोनों पक्षों ने मध्य और पश्चिमी इलाके में सीमा विवाद को माना था। यहां तक कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौते पर सहमति बनी थी। अगर चीन को पूर्वी इलाके में अपनी स्थिति कानूनी रूप से सही लग रही थी कि तो उसे यह मसला बहुत पहले उठाना चाहिए था।
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अभी तक 24 दौर की बातचीत, पर पूर्वी इलाके पर चर्चा नहीं

चीन और भूटान ने वर्ष 1984 से लेकर 2016 के बीच में अब तक 24 दौर की बातचीत की है। इस दौरान बातचीत में केवल पश्चिम और मध्य इलाके के विवाद पर चर्चा हुई थी। पूर्वी इलाके में सीमा विवाद पर चीन ने पहली बार स्वीकारोक्ति की है। भूटान के एक विशेषज्ञ का कहना है कि यह पूरी तरह से चीन का नया दावा है। दोनों पक्षों के जिन दस्तावेजों पर दस्तखत हुए हैं, उनमें केवल पश्चिमी और मध्य हिस्से में विवाद की बात कही गई थी।

वन्यजीव अभयारण्य की जमीन को विवादित बताया

इससे पहले जून में चीन ने भूटान की एक नई जमीन पर अपना दावा ठोका था। वाशिंगटन स्थित वैश्विक पर्यावरण सुविधा परिषद (जीईएफ) की 58वीं वर्चुअल बैठक में भूटान के साकतेंग वन्यजीव अभयारण्य की जमीन को विवादित बताते हुए इसे दिए जाने वाले पैसों पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी। उस वक्त भूटान ने चीन की इस चाल का विरोध करते हुए अभयारण्य की जमीन को अपना अभिन्न अंग बताया था। हाल ही में भूटान ने सीमा विवाद को लेकर चीन के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया था।

2007 में हुई थी भारत-भूटान मैत्री संधिे

2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि के मुताबिक दोनों देश राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग कर सकते हैं। भूटान के साथ भारत के हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने पहले विदेश दौरे के रूप में भूटान को ही चुना था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि पड़ोसी देशों से मजबूत संबंध बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी।
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