फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   China is facing a deep energy crisis, at the same time natural gas prices soar in Britain

अचानक दुनिया में गहरा गया है ऊर्जा संकट: कोयले और प्राकृतिक गैस की कीमतों में इजाफे से बढ़ा दबाव

Sat, 02 Oct 2021 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 02 Oct 2021 03:54 PM IST
सार

विश्लेषकों के मुताबिक ये संकट कई कारणों से खड़ा हुआ है। उनमें कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं के खुलने से बढ़ रही मांग एक बड़ी वजह है। कोयले की कीमत में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी ने संकट को और पेचीदा बना दिया है। पश्चिमी देशों और चीन में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए अपनी गई नीतियों की वजह से भी ये संकट बढ़ा है...

विज्ञापन
China is facing a deep energy crisis, at the same time natural gas prices soar in Britain
पावर सेक्टर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

एक तरफ चीन ऊर्जा के गहरे संकट से जूझ रहा है, उसी समय ब्रिटेन में प्राकृतिक गैस के दाम तेजी से बढ़े हैं। इस कारण ब्रिटेन के ऊर्जा सप्लायर भारी दबाव में हैं। कई दूसरे यूरोपीय देशों को भी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। यूरोप में ये आम आशंका है कि सर्दी बढ़ने के साथ ये संकट और गहरा जाएगा। उस समय घरों को गर्म रखने के लिए अधिक गैस और बिजली की जरूरत होगी।

विज्ञापन


चीन में हालत यह है कि वहां सरकार ने ऊर्जा कंपनियों से कहना है कि ईंधन सप्लाई को सुरक्षित बनाने के लिए वे ‘जो भी जरूरी है, उसे करें।’ चीन के उप प्रधानमंत्री हान झेंग ने ऊर्जा कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक बैठक में कहा कि देश चलता रहे, इसे सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। चीन में कोयले की कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। इससे कारखानों का संचालन और घरेलू उपभोग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन


इधर ब्रिटेन में ऊर्जा कंपनियां पहले से तय कीमत के मुताबिक गैस की सप्लाई नहीं कर पा रही हैं। देश के कारोबारी घरानों ने ब्रिटिश सरकार की आलोचना भी तेज कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बोरिस जॉनसन की सरकार संकट का अनुमान लगाने और उसके मुताबिक जरूरी तैयारी करने में नाकाम रही। कारोबारी समूहों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट के संकेत काफी पहले से मिल रहे थे। एक अनुमान के मुताबिक गैस, डीजल और पेट्रोल की बढ़ रही कीमत के कारण ब्रिटेन में मुद्रास्फीति की दर आने वाले महीनों में चार फीसदी से ज्यादा हो जाएगी। उसका आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

विश्लेषकों के मुताबिक ये संकट कई कारणों से खड़ा हुआ है। उनमें कोरोना महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं के खुलने से बढ़ रही मांग एक बड़ी वजह है। कोयले की कीमत में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी ने संकट को और पेचीदा बना दिया है। पश्चिमी देशों और चीन में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए अपनी गई नीतियों की वजह से भी ये संकट बढ़ा है। चीन ने इस मकसद से अपने कई कोयला खदान बंद कर दिए थे। वहां अब उन्हें दोबारा चालू करने की मांग उठ रही है।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक खबर के मुताबिक रूसी गैस उत्पादक कंपनी गैजप्रोम गैस की कीमत और बढ़ाने की तैयारी में है। गैजप्रोम यूरोप में गैस की प्रमुख सप्लायर कंपनी है। उधर अमेरिका की लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) की सप्लायर कंपनियां मांग के मुताबिक गैस की सप्लाई नहीं कर पा रही हैं। यूरोप और अमेरिका में सर्दी का मौसम करीब आ रहा है। उससे मांग और बढ़ गई है।

ब्रिटेन के पास उत्तरी सागर में गैस के बड़े भंडार हैं। लेकिन उसने वहां से गैस निकालने का काम रोक दिया था। इसलिए वह पश्चिम एशिया से होने वाली एलएनजी की सप्लाई पर अधिक निर्भर हो गया। थिंक टैंक ऑक्सफॉर्ड इकोनॉमिक्स में प्रमुख ऊर्जा अर्थशास्त्री टॉबी ह्विटिंग्टन के मुताबिक यूरोप और एशिया में पिछले 12 महीनों के दौरान गैस की कीमतों में पांच गुना इजाफा हुआ है। उन्होंने द गार्जियन से कहा- ‘प्राकृतिक गैस से विश्व बाजार में एक तूफान आया हुआ है।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed