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चीन अब बनाएगा ‘हेल्थ सिल्क रोड’, अग्रणी वैक्सीन निर्यातक बनने में झोंकी ताकत

Mon, 19 Apr 2021 04:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 19 Apr 2021 04:13 PM IST
सार

चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के समानंतर ‘हेल्थ सिल्क रोड’ भी बना रहा है। जिन देशों ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में भागीदारी की है, उन्हें वह वैक्सीन देने में प्राथमिकता दे रहा है। ऐसा करने से उन क्षेत्रों में उसका प्रभाव बढ़ेगा। अगर वे देश उसके सहयोगी नहीं बने, तो कम से कम विरोधी भी नहीं रहेंगे..

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China is also building a Health Silk Road like Belt and Road Initiative to influence partnering countries to supply coronavirus vaccine
चीनी साइनोवैक वैक्सीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन ने दुनिया का सबसे प्रमुख वैक्सीन सप्लायर बनने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। कोविड-19 महामारी के बीच उसे ये हैसियत हासिल करने का मौका नजर आया है। चाइना एसोसिएशन फॉर वैक्सींस के अध्यक्ष फेंग दुओजिया के मुताबिक चीन इस साल के अंत तक अपनी 70 फीसदी आबादी यानी 98 करोड़ लोगों का टीकाकरण करेगा। इतनी ही संख्या में वह कोरोना वैक्सीन की डोज भी निर्यात करेगा। एसोसिएशन के मुताबिक मार्च के अंत चीन ने 10 करोड़ वैक्सीन डोज का निर्यात किया था। ये संख्या भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) से हुए कुल निर्यात के बराबर है।

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हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बातचीत में फेंग ने कहा कि चीन का लक्ष्य अगले साल के अंत तक पांच अरब वैक्सीन डोज के उत्पादन का है। गौरतलब है कि 2019 में चीन में सभी रोगों की वैक्सीन के कुल 50 करोड़ 80 लाख डोज उत्पादित हुए थे। अब 2022 के अंत तक चीन अपना लक्ष्य हासिल कर पाया, तो इसका मतलब 2019 की तुलना में वैक्सीन उत्पादन की क्षमता में दस गुना बढ़ोतरी होगी।
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फेंग ने बताया कि चीन में वैक्सीन की 18 नई प्रोडक्शन लाइनें बनाई जा रही हैं। इनमें हर प्रोडक्शन लाइन देश की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी चाइना नेशनल बायोटक ग्रुप के बराबर आकार की होगी। अभी तक विकासशील देशों के लिए भारत वैक्सीन का सबसे बड़ा वैश्विक सप्लायर है। विकासशील देश भारत के अलावा रूस से भी टीकों का आयात करते हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं से प्रमाणपत्र पाने की है।
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फेंग ने भी यह स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय या उससे भी ऊंचे मानकों के मुताबिक बड़ी मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन करना एक बड़ी चुनौती है और ये काम दो साल के अंदर ही पूरा करना है। फेंग ने कहा कि पिछले साल विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दुनिया को वैश्विक कल्याण के नजरिए से वैक्सीन मुहैया कराने का वादा किया था। उसके बाद से चीन में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की वैक्सीन बनाने का मिशन शुरू किया गया।

अमेरिकी थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन में चीन की स्वास्थ्य नीति संबंधी विशेषज्ञ जेनिफर बाउये ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि दुनिया में इस समय वैक्सीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। वैक्सीन का कम उत्पादन इस वक्त महामारी रोकने में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। कोरोना महामारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दुनिया में कम से कम दस अरब वैक्सीन डोज की तुरंत जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब तक इतना टीकाकरण नहीं होता, कोई सुरक्षित नहीं है।

बाउये ने कहा कि इस स्थिति को चीन ने अपने लिए एक अवसर के रूप में लिया है। जरूरत के वक्त पर वैक्सीन मुहैया कराने से गरीब और विकासशील देशों पर उसका प्रभाव बढ़ेगा। अमेरिका में बोस्टन स्थित नॉरईस्टर्न यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल एल्ड्रिच के मुताबिक चीन अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के समानंतर ‘हेल्थ सिल्क रोड’ भी बना रहा है। जिन देशों ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में भागीदारी की है, उन्हें वह वैक्सीन देने में प्राथमिकता दे रहा है। ऐसा करने से उन क्षेत्रों में उसका प्रभाव बढ़ेगा। अगर वे देश उसके सहयोगी नहीं बने, तो कम से कम विरोधी भी नहीं रहेंगे।


वैश्विक गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्था- प्रोग्राम फॉर एप्रोप्रियेट टेक्नोलॉजी में चीन के प्रतिनिधि युवान का कहना है कि कम और मध्य आय वाले देश वैक्सीन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर निर्भर हैं। इसलिए चीनी वैक्सीन को इन मानकों पर अवश्य खरा उतरना होगा। जहां तक कोरोना वायरस के टीकों सवाल है, इस समय दुनिया में कुल 19 वैक्सीन उपयोग या परीक्षण के अलग-अलग दौर में हैं। इनमें पांच चीन में बनाए गई वैक्सीन भी हैं।

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