चीनी विदेश मंत्रालय ने 'प्रेस वार्ता' में नहीं दिया मीडिया के किसी सवाल का जवाब, मारे गए सैनिकों की जानकारी भी नहीं दी
पूर्वी लद्दाख के गलवां घाटी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 15 जून की रात हुई भारतीय और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को प्रेस वार्ता की। हालांकि, यह प्रेस वार्ता केवल नाम की रही। यहां मीडिया द्वारा पूछे गए न तो किसी सवाल का जवाब दिया गया और न ही भिड़ंत में मारे गए चीनी सैनिकों के बारे में कोई जानकारी दी गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया ने भारत-चीन सैनिकों की झड़प को लकेर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन से छह सवाल किए, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। वह बस एक ही राग अलापते रहे कि इस विवाद को शांतिपूर्वक हल से बातचीत के जरिए हल करेंगे। उन्होंने यह जानकारी तक नहीं दी कि इस भिड़ंत में चीन के कितने सैनिक मारे गए।
झाओ ने मीडिया के कई अहम सवालों का जवाब ही नहीं दिया। एक रिपोर्टर ने सवाल किया था कि क्या गलवां नदी पर चीन कोई बांध बना रहा है जिससे भारत-चीन सीमा पर इसके प्रवाह को रोका जा सके। झाओ ने इस सवाल का कोई उत्तर नहीं दिया। इसके अलावा गलवां घाटी में हुई झड़प का कारण पूछने पर झाओ ने इसके लिए भारतीय पक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनका इसमें कोई हाथ नहीं है।
फिर भारत को ठहराया जिम्मेदार, कहा- अब स्थिति नियंत्रण में
वार्ता के दौरान झाओ ने एलएसी पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर फिर से भारत पर आरोप लगाया। उन्होंने गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर कहा- चीन ने बार-बार यह कहा है कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि भारतीय सैनिकों ने दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को तोड़ा।Border situation is overall stable&controllable. We believe that under guidance of consensus reached by leaders of 2 countries, 2 sides can properly handle the situation, jointly safeguard peace& stability along the border&promote healthy & stable bilateral relations: Zhao Lijian https://t.co/SyoMXsqP96
— ANI (@ANI) June 18, 2020
लिजिआन ने कहा, फिलहाल सीमा पर स्थिति स्थिर है और नियंत्रण में है। हम भरोसा करते हैं कि दोनों देशों के नेता जिस परिणाम पर पहुंचे हैं उसके तहत दोनों पक्ष स्थिति को समझदारी से संभालेंगे और संयुक्त रूप से शांति स्थापित करेंगे।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष स्वस्थ और स्थायी द्विपक्षीय संबंध स्थापित करेंगे। बता दें कि 15 जून की रात हुई इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद से देशभर में चीन के प्रति भारी गुस्सा है।