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उइगर के बाद चीन के निशाने पर उत्सुल मुस्लिम, धार्मिक पहचान मिटाने की कोशिशें

Thu, 18 Feb 2021 01:38 AM IST
देव कश्यप न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, सान्या (चीन)
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, सान्या (चीन) Published by: देव कश्यप Updated Thu, 18 Feb 2021 01:38 AM IST
सार

  • समुदाय की धार्मिक पहचान मिटाने की कोशिशें जारी।
  • चायना ड्रीम के स्टीकरों से दबाए गए इस्लामी संकेत।

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China Efforts to erase the religious identity of Utsul Muslims
A mosque in Sanya - फोटो : The New York Times

विस्तार

चीन के हैनान द्वीप के उत्सुल मुसलमान एक समय उनके मुस्लिम दुनिया से संपर्कों के चलते सरकार द्वारा हाथों-हाथ लिए जाते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। जिस तरह शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहा है उसी तरह इस क्षेत्र के 10,000 से अधिक उत्सुल मुसलमानों की धार्मिक पहचान भी मिटाने की कोशिशें चल रही हैं। इन कोशिशों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सारी हदें पार कर दी हैं।

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दक्षिण चीन के इस शहर में उत्सुल समुदाय के करीब 1,000 साल पुराने गली-मोहल्लों में अजान अब भी लगती है, दुकानों-घरों में अरबी भाषा में लिखे ‘अल्ला-हू-अकबर’ तथा ‘अल्लाह महान है’ जैसे संकेत अब भी लिखे हैं, लेकिन चीन सरकार ने इन्हें ‘चायना ड्रीम’ के स्टीकरों से दबा दिया है। रेस्तरां और मेन्यू में से ‘हलाल’ जैसे इस्लामी अर्थ बताने वाले शब्दों को हटा दिया गया है।
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चीनी अधिकारियों ने दो इस्लामी स्कूल बंद कर दिए हैं और महिला छात्रों को हिजाब पहनने से रोकने की कोशिशें की गई हैं। यहां तक कि मस्जिदों पर लाउड स्पीकर भी नहीं लगने दिए जा रहे हैं। अमेरिका के मेरीलैंड में चीनी मुस्लिमों के विशेषज्ञ प्रोफेसर मा हैयून ने बताया कि उत्सुल मुस्लिमों पर सख्त नियंत्रण स्थानीय समुदायों के खिलाफ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का असली चेहरा उजागर करता है। यह सब पूरी तरह इस्लाम विरोधी है।
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मस्जिदें तोड़ीं, बच्चों की अरबी शिक्षा रोकी
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की पूरी कोशिश है कि उत्सुल मुस्लिमों की धार्मिक पहचान खत्म हो जाए। इसके लिए हैनान द्वीप पर बसे सान्या शहर में पार्टी ने विदेशी प्रभाव और धर्मों के खिलाफ मुहिम चला रखी है। शी जिनपिंग से पहले का प्रशासन उत्सुल मुस्लिमों का समर्थन करता था, लेकिन शी जिनपिंग के आने के बाद उनकी पहचान मिटाने की कोशिशें चल रही हैं। इसके तहत मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है। अजान के लिए लगे लाउड स्पीकरों को गुंबद से हटाकर जमीन पर रखने को कहा गया है। उनकी आवाज भी धीमी कर दी गई है। यही नहीं, बल्कि शहर में 18 साल से कम उम्र के बच्चों की अरबी शिक्षा रोक दी गई है।

न्यायोचित है कार्रवाई : चीनी अधिकारी 
कम्युनिस्ट पार्टी का दावा है कि चीन में इस्लाम और मुस्लिम समुदाय पर लगाई गई पाबंदियों का मकसद हिंसात्मक धार्मिक अतिवाद को काबू करना है। चीनी प्रशासन से जुड़े स्थानीय अधिकारी लेंग एन हुई ने इस कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया है।

मानवाधिकार हनन पर चीन को चुकानी होगी कीमत : बाइडन
अल्पसंख्यकों के साथ बुरे बर्ताव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन को चेताया है। उन्होंने कहा, मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चीन को भारी कीमत चुकानी होगी। अमेरिका इसके खिलाफ खड़ा होगा और इससे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वाकिफ हैं। बाइडन ने यह बात सीएनएन टाउन हॉल में कही। बाइडन ने कहा, 'उन्होंने अपने फोन कॉल के दौरान शी के सामने यह मुद्दा उठाया था।'


ब्लॉगरों पर नियंत्रण के लिए नया कानून
सोशल मीडिया पर चीन विरोधी कुछ आवाजें दुनिया को अब तक ब्लॉगरों के माध्यम से पता चलते थे लेकिन अब इन्हें दबाने के लिए भी चीन नया कानून लाने वाला है। इसके तहत आगामी सप्ताह की शुरुआत से ब्लॉगरों और इंफ्लुएंसर्स को कुछ भी लिखने से पूर्व चीन सरकार द्वारा स्वीकृत दस्तावेजों की जरूरत होगी। इस दस्तावेज को कुछ भी लिखने से पहले चीन के साइबरस्पेस प्रशासन को दिखाना होगा। ताइवान में नेशनल सन यात-सेन यूनिवर्सिटी में चीनी सामाजिक मीडिया नीति के विशेषज्ञ टाइटस चेन ने कहा, चीन सूचना के पूरे सिस्टम पर नियंत्रण पाना चाहता है, इसलिए ऐसा किया जा रहा है।

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