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कैसे पैदा हुआ कोविड-19 वायरस, क्या कभी सामने आ पाएगा इसका सच?
Wed, 06 Jan 2021 02:02 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 06 Jan 2021 02:02 PM IST
सार
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस बारे में अभी अनुसंधान चल रहा है। लेकिन मोटे तौर पर वह इससे सहमत है कि इसकी शुरुआत वुहान से हुई...
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wuhan coronavirus
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
कोरोना वायरस के उद्गम का पता लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दल के वुहान जाने के रास्ते में चीन ने रुकावटें खड़ी कर दी हैं। इसके पीछे चीन की क्या मंशा है, अब इसे लेकर कयास लगाए जा रह हैं। गौरतलब है कि कोविड- 19 वायरस की शुरुआत कैसे और कहां से हुई, इस बारे में चीन बाकी दुनिया की समझ से अलग अपनी कहानी पेश करता रहा है। माना जा रहा है कि एक बार फिर वह यही संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि कोरोना महामारी के लिए उसे दोषी ठहराने की बाकी दुनिया की समझ को वह स्वीकार नहीं करता।
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जांच दल को भेजने का फैसला डब्ल्यूएचओ के पिछले अधिवेशन में हुआ था। तब भी चीन ने इससे संबंधित प्रस्ताव को पारित ना होने देन की कोशिश की थी। लेकिन विश्व जनमत के दबाव में वह जांच दल के गठन और वुहान जाकर जांच करने के उसके कार्यक्रम पर वह सहमत हुआ था। ये दल इसी हफ्ते वुहान पहुंचने वाला था। लेकिन चीन ने आखिरी वक्त तक दल के सदस्यों के यात्रा दस्तावेजों को मंजूरी नहीं दी। इस पर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेसस ने निराशा जताई है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि दो सदस्य यात्रा शुरू कर चुके हैं, लेकिन बाकी सदस्यों के वुहान जाने के रास्ते में आखिरी वक्त में मुश्किलें खड़ी कर दी गई हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण सबसे पहले चीन के वुहान में ही दिखे थे। वैज्ञानिकों का तब से मानना है कि ये वायरस दूसरे जीवों से मनुष्य में कैसे संक्रमित हुआ, इसे जानना बेहद जरूरी है। इसीलिए जांच दल को वुहान भेजने का फैसला हुआ था। लेकिन ऐसा लगता है कि सच को पता करने की कोशिश चीन और पश्चिमी देशों के बीच इस समय चल रहे टकराव की भेंट चढ़ सकती है। अमेरिका और उसके साथी देशों ने कोरोना वायरस को लेकर चीन के खिलाफ मुहिम चलाई। चीन का मानना है कि ये देश एक महामारी का इस्तेमाल अपने रणनीतिक मकसदों के लिए कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने इस वायरस को ऐसा डंडा बना लिया है, जिससे चीन की पिटाई की जा सके।
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इसके जवाब में चीन कोरोना महामारी पर अपनी अलग कहानी फैलाने में लगा रहा है। हाल ही में चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग यी ने कहा कि “अधिक से अधिक अध्ययनों से ये जाहिर हुआ है कि कोरोना वायरस कई क्षेत्रों में पैदा हुआ।” चीनी मीडिया में इसके पहले दावा किया गया था कि कोरोना वायरस के लक्षण सबसे पहले यूरोप में दिखे थे। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस बारे में अभी अनुसंधान चल रहा है। लेकिन मोटे तौर पर वह इससे सहमत है कि इसकी शुरुआत वुहान से हुई। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अभी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि वायरस के संक्रमण की शुरुआत वुहान में कहां और कब हुई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना वायरस के शुरुआती मामले हुनान समुद्री-खाद्य (सी फूड) बाजार में सामने आए थे। इस बाजार को अब बंद किया जा चुका है। इसी शहर में पिछले साल 11 जनवरी को कोरोना संक्रमण के कारण पहली मौत हुई थी। इस वायरस का पहला शिकार एक 61 वर्षीय व्यक्ति बना था, जो नियमित रूप से इस बाजार में जाता था। विशेषज्ञ अभी इस बारे में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति क्या इसी बाजार में हुई या यहां से उसका मानव में संक्रमण शुरू हुआ। कई विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि उस बाजार को बंद किया जा चुका है, इसलिए अब वहां से विश्वसनीय साक्ष्य प्राप्त होने की संभावना बेहद घट चुकी है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता इस आशंका से चिंतित हैं कि एक मानवीय त्रासदी का सच दो बड़ी ताकतों की होड़ का शिकार बन सकता है। जिनेवा स्थित ग्लोबल हेल्थ सेंटर की अध्यक्ष इलोना किकबुश ने लंदन के अखबार गार्जियन से बातचीत में इस बात की याद दिलाई कि कैसे शीत युद्ध के समय गहरी प्रतिस्पर्धा के बीच भी अमेरिका और सोवियत यूनियन चेचक खत्म करने की योजना बनाने पर सहमत हो गए थे। उसी सहमति का परिणाम था कि चेचक को खत्म किया जा सका।
इस सिलसिले में इसका उल्लेख भी किया गया है कि कोरोना वायरस के एक अन्य प्रकार- सार्स से जब 2002-03 में महामारी फैली तब दुनिया भर के देशों ने सहयोग का रुख अपनाया। इससे जल्द ही इस बीमारी पर काबू पा लिया गया। लेकिन आज हालात इतने तनावपूर्ण और विषैले हैं कि कोविड-19 के सच तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है। इलोना किकबुश ने ध्यान दिलाया कि पहले ही काफी समय बीत चुका है, इसलिए अब कोविड-19 का सच ढूंढ पाना लगभग नामुमकिन सा लगता है। ऐसे में चीन की तरफ से की जा रही देर सचमुच निराशा और चिंता की बात है। विशेषज्ञों के मुताबिक सच का पता लगना इसलिए भी जरूरी है ताकि भविष्य में और ऐसे खतरनाक वायरसों की उत्पत्ति को रोका जा सके।