बनाया चौथी पीढ़ी का स्वदेशी रिएक्टर: चीन बढ़ा रहा है परमाणु ऊर्जा पर अपनी निर्भरता, ये है वजह
चौथी पीढ़ी के परमाणु ऊर्जा सिस्टम की खूबी यह है कि इसमें ईंधन कम लगता है और आर्थिक नजरिए से यह ज्यादा लाभदायक है। साथ ही इससे ऐसा रेडियोएक्टिव पदार्थ भी पैदा नहीं होता, जो लंबे समय तक नष्ट न हो। स्वीडन की अनुसंधान संस्था एनर्जिफोर्स्क के मुताबिक ऐसे रिएक्टर से रेडियो एक्टिव पदार्थ लीक होने जैसे हादसे होने की आशंकाएं कम रहेंगी...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन ने दावा किया है कि परमाणु ऊर्जा संबंधी टेक्नोलॉजी के मामले में वह दुनिया में अग्रणी हो गया है। उसने कहा है कि वह अपने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार कर रहा है, ताकि कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों पर निर्भरता घटाई जा सके। उसने दोहराया है कि वह साल 2060 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के अपने लक्ष्य पर कायम है।
हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक बीते रविवार को चीन के शिदाओवान में स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हाई टेंपरेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर (एचटीजीआर) चालू हो गया। बताया जाता है कि अपनी तरह का दुनिया का पहला रिएक्टर है। चीन ने इसका निर्माण 2012 में शुरू किया था। इस संयंत्र से 200 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इसी साल इस रिएक्टर को चीन के पॉवर ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा। इस रिएक्टर का निर्माण कंपनी समूह- चाइना हुआनेंग ग्रुप ने किया है। इस ग्रुप ने कहा है कि इस रिएक्टर की तकनीक पूरी तरह चीन के अंदर विकसित की गई है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कहा है कि इस नई तकनीक का सफल होना एक बड़ी सफलता है। इससे यह भी जाहिर हुआ है कि इस मामले में चीन अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पेरिस स्थित ऊर्जा विज्ञान विशेषज्ञ गियाकोमो लुचियानी ने अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘शिदाओवान में चालू हुए एचटीजीआर को चौथी पीढ़ी का परमाणु रिएक्टर समझा जाता है। वहां इसकी क्षमता 200 मेगावाट है। इस लिहाज से यह एक छोटी मशीन है। लेकिन इसका सफलता से चालू हो जाना एक बड़ी कामयाबी साबित हो सकता है। इसलिए हम इसे गहरी दिलचस्पी के साथ देख रहे हैं।’
जानकारों के मुताबिक दुनिया में इस समय जो परमाणु रिएक्टर हैं, उनमें ज्यादातर दूसरी पीढ़ी के रिएक्टर हैं। कुछ तीसरी पीढ़ी के रिएक्टर भी चल रहे हैं। उनमें दो चीन के गुआंगदोंग प्रांत में हैं। ऐसा पहला रिएक्टर चीन के फुजियान प्रांत के फुचिंग में लगा था। इसे भी चीन के अंदर ही देसी तकनीक से तैयार किया गया था। इस रिएक्टर से इसी साल जनवरी में व्यापारिक तौर पर बिजली का उत्पादन चालू हो गया।
जानकारों के मुताबिक चौथी पीढ़ी के परमाणु ऊर्जा सिस्टम की खूबी यह है कि इसमें ईंधन कम लगता है और आर्थिक नजरिए से यह ज्यादा लाभदायक है। साथ ही इससे ऐसा रेडियोएक्टिव पदार्थ भी पैदा नहीं होता, जो लंबे समय तक नष्ट न हो। स्वीडन की अनुसंधान संस्था एनर्जिफोर्स्क के मुताबिक ऐसे रिएक्टर से रेडियो एक्टिव पदार्थ लीक होने जैसे हादसे होने की आशंकाएं कम रहेंगी। इलेक्ट्रिक पॉवर प्रोमोशन काउंसिल की परमाणु ऊर्जा संबंधी चीन शाखा के महासचिव वांग यिंगसु ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘इसमें कोई शक नहीं है कि चीन परमाणु तकनीक में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। अब चालू हुई तकनीक सबसे उन्नत तकनीक है और यह सिर्फ चीन के पास है।’
लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र कार्बन शून्यता के लक्ष्य को हासिल करने का बेहतर तरीका नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि इनका निर्माण महंगा होता है और उसमें बहुत समय लगता है। लंदन स्थित नीति संबंधी परामर्श देने वाली संस्था चैटहम हाउस में सीनियर रिसर्च फेलॉ एंटनी फ्रोगैट का कहना है- ‘संभवना इसी बात की है कि चीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाता रहेगा। लेकिन मेरी राय में कार्बन उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य अक्षय ऊर्जा अपनाने से ही पूरा होगा।’