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Hindi News ›   World ›   China: Beggers go cashless, using QR code to get alms, so you can't say you don't have loose change

चीन: क्यूआर कोड से भीख मांग रहे भिखारी, हफ्ते की 45 हजार रु. कर रहे कमाई

Sat, 13 Jul 2019 01:34 PM IST
Priyesh Mishra वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Priyesh Mishra Updated Sat, 13 Jul 2019 01:34 PM IST
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China: Beggers go cashless, using QR code to get alms, so you can't say you don't have loose change
क्यूआर कोड (फाईल फोटो) - फोटो : social media
अगर आपके पास छुट्टे पैसे नहीं है तो आप अक्सर भिखारियों को पैसे देने से मना कर देते हैं। पर अगर क्या हो कि भिखारी आपसे क्यूआर कोड से पैसे देने को कहे। ऐसा ही मामला चीन में देखने को मिल रहा है। चीन में भिखारी भी डिजिटल हो चुके हैं। भिखारी अब भीख मांगने के लिए क्यूआर कोड और ई-वालेट का इस्तेमाल कर रहे है। 
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ये भिखारी भी़ड़ भाड़ वाली जगहों या पर्यटन स्थलों पर खड़े हो जाते हैं और साथ में कटोरे के साथ क्यूआर कोड का कार्ड लटकाये रहते हैं। चीन में अलीबाबा की अलीपे और वी चैट बड़ी ई-वॉलेट कंपनियों में शामिल हैं। 
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दरअसल, चीन में भिखारियों के डिजिटल होने का बड़ा कारण यह है कि उन्हें आसानी से भीख मिल जाए और कोई छुट्टे पैसे नहीं होने का बहाना भी न बना पाए। इस प्रकार भिखारियों को उन लोगों से भी भीख मिलती है जिनेक पास छुट्टे पैसे नहीं है। वे लोग भी क्यूआर कोड को स्कैन कर भिखारी को पैसे दे सकते है। ये डिजिटल भिखारी लोगों से अनुरोध करते है कि वे अलीबाबा ग्रुप के अली पे या टैन्सेंट के वीचैट वॉलेट के द्वारा भीख दे सकते हैं।
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चीन के स्थानीय चैनलों की मानें तो इस व्यवस्था के साथ बाजार भी जुड़ गया है। कई प्रकार के प्रायोजक (स्पांसर्स) भी जुड़ गए है। अगर कोई भिखारी को कुछ भी न दें लेकिन इन कोड को स्कैन भी कर लें तो भिखारी को कुछ न कुछ पैसे मिल जाते हैं। 

इस व्यवस्था से भिखारियों की हफ्ते की कमाई 45 हजार रुपये तक हो जा रही है। इसके पीछे की वजह यह है कि यहां कई ई-वालेट कंपनियों ने भिखारियों को क्यूआर कोड उपलब्ध करवा दिए है। क्यूआर कोड स्कैन करते ही भीख देने वाले लोगों का डेटा इन कंपनियों को मिल जाता है। ये कंपनियां डेटा बेच कर खासी रकम जुटा रही हैं।

 

चीन में भिखारियों को अपना खाता संचालित करने के लिए मोबाइल फोन की भी जरुरत नहीं है। क्यूआर कोड से मिली रकम सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में चली जाती है। फिर भिखारी इस कोड को लेकर स्थानीय किराना दुकानों या अन्य स्टोरों पर जाकर सामान खरीद सकते हैं। इसमें खास बात है कि इसे चलाने के लिए बैंक खाते की जरुरत नहीं होती है। 

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