China-Australia: क्या अब सचमुच सुधर जाएंगे ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते?
China-Australia: ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग मंगलवार को चीन यात्रा पर पहुंचीं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कायम होने की 50वीं सालगिरह के मौके पर वे यहां आई हैं। ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध पिछले चार साल में तेजी से बिगड़े हैं...
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अमेरिकी नेतृत्व वाले समूहों ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंगडम- यूनाइटेड स्टेट्स) और क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वैड) के सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया की चीन (China-Australia) से संबंध सुधारने की कोशिश ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। ऑकुस और क्वैड का मकसद चीन की बढ़ती ताकत पर लगाम लगाना समझा जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग मंगलवार को चीन यात्रा पर पहुंचीं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कायम होने की 50वीं सालगिरह के मौके पर वे यहां आई हैं। ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध पिछले चार साल में तेजी से बिगड़े हैं। दोनों देशों में सुरक्षा संबंधी तनाव पैदा होने के साथ-साथ व्यापार संबंधों में भी गिरावट आई है। अब माना जा रहा है कि वॉन्ग की यात्रा का उद्देश्य संबंधों को पटरी पर लाना है।
वॉन्ग के बीजिंग के लिए रवाना होने से ठीक पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई की इस यात्रा से दोनों देशों में रणनीति वार्ता का नया दौर शुरू होगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस नए दौर में उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबध फिर से पटरी पर लौट आएंगे। अपने विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए वॉन्ग ने कहा- ‘दोनों देशों के संबंधों के बीच कई कठिन मुद्दे हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के हित में हल करने में वक्त लगेगा। मैं अपनी इस यात्रा को उस रास्ते में एक कदम की तरह देख रही हूं।’ बीजिंग पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय तक आपसी यात्राओं के ठहरे रहने के बाद चीन पहुंच कर मुझे ‘बहुत अच्छा’ महसूस हो रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक इस वर्ष मई में ऑस्ट्रेलिया में सरकार बदलने के बाद चीन और ऑस्ट्रेलिया के संबंध सुधरने की गुंजाइश बनी है। एंथनी एल्बानीज के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी की सरकार पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन की सख्त नीति से पीछे हटी है। एल्बानीज ने संबंध सुधारने की पहल करते हुए पिछले महीने इंडोनेशिया के बाली में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष संबंधों को अब बेहतर करना चाहते हैं।
दोनों देशों के बीच तनाव की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका का अनुकरण करते हुए चीन की कंपनियों हुवावे और जेडटीई टेलीकम्यूनिकेशंस के उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया। 2020 में पूर्व प्रधानमंत्री मॉरीसन ने कोविड-19 वायरस के उत्पत्ति की जांच कराने की मांग की। ऑस्ट्रेलिया के इन कदमों पर कड़ी प्रतिक्रिया दिखाते हुए चीन ने ऑस्ट्रेलिया से बीफ, कोयला, जौ, समुद्री खाद्यों और वाइन का आयात रोक दिया। इसका ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत खराब असर हुआ।
इन कदमों के कारण बढ़े तनाव के बावजूद दोनों देशों में कई क्षेत्रों में व्यापार जारी रहा। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापार सहभागी है। चीन ने 2021 में ऑस्ट्रेलिया से लगभग 154 बिलियन डॉलर का आयात किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया को चीन से 66 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ।
सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में स्थित ऑस्ट्रेलिया- चाइना रिलेशंस इंस्टीट्यूट में रिसर्चर एलीना कॉलिसन के मताबिक, ‘लेबर पार्टी की सरकार के सत्ता में आने से संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति हुई है। इसके बावजूद मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई सरकार यथार्थवादी नजरिया अपना रही है। उसके मंत्रियों ने साफ कहा है कि संबंधों को स्थिर बनाने का मतलब संबंधों को नया रूप दिया जाना नहीं है।’