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Canada: कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा पर दो वर्ष की समय सीमा, भारतीयों पर पड़ेगा असर

Tue, 23 Jan 2024 05:54 AM IST
यशोधन शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,मॉन्ट्रियल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,मॉन्ट्रियल Published by: यशोधन शर्मा Updated Tue, 23 Jan 2024 05:54 AM IST
सार

कनाडा की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2024 के लिए, संघीय सरकार का लक्ष्य तीन लाख 60 हजार स्नातक अध्ययन परमिट को मंजूरी देना है, जिससे 2023 से संख्या 35 प्रतिशत कम हो जाएगी। संघीय सरकार के इस फैसले से भारतीय छात्रों पर बड़ा असर पड़ेगा।

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Canadian government announces two-year cap on student visas
छात्र वीज़ा पर दो साल की सीमा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कनाडा ने आवास संकट से निपटने के लिए नए अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा पर तत्काल दो वर्ष की समय सीमा तय की है। इस कदम से देश में पढ़ाई के इच्छुक भारतीय छात्रों पर असर पड़ेगा। आव्रजन मंत्री मार्क मिलर ने कहा कि समय सीमा के तहत 2024 में नए अध्ययन वीजा में 35% की कमी आएगी।

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इस सीमा के चलते 2024 में 3.64 लाख नए वीजा जारी किए जा सकते हैं। 2023 में करीब 5.60 लाख वीजा जारी हुए थे। वहीं 2025 में जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या का इस वर्ष के अंत में पुनर्मूल्यांकन होगा। इस कदम का भारतीयों पर सबसे बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि कनाडा उनका पसंदीदा गंतव्य है।
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गैर स्थायी निवासियों की संख्या बढ़ने से उठाया कदम
सीबीसी न्यूज ने कहा, यह कदम कनाडा में प्रवेश करने वाले गैर-स्थायी निवासियों की बढ़ती संख्या को लेकर प्रांतों की ओर से संघीय सरकार पर दबाव के बीच उठाया गया है, जबकि देश आवास संकट से जूझ रहा है। 2022 में आठ लाख से अधिक विदेशी छात्रों को अस्थायी अध्ययन वीजा जारी किया गया था।
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छात्रों को फर्जी डिग्री देने वाले संस्थान बढ़े
मिलर ने कहा कि सीमा लगाकर संघीय सरकार कुछ छोटे निजी कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। मिलर के मुताबिक, कनाडा में रहने की उम्मीद रखने वाले छात्रों को डिग्री देने वाले संस्थान फर्जी बिजनेस डिग्री दे रहे हैं।

वीजा की संख्या का होगा पुनर्मूल्यांकन
प्रत्येक क्षेत्र तय करेगा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में परमिट कैसे वितरित किए जाएंगे। यह सीमा दो साल के लिए लागू रहेगी, जिसमें 2025 में जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।

यहां पड़ेगा असर
मिलर ने कुछ निजी संस्थानों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का लाभ उठाने, कम संसाधन वाले परिसरों का संचालन करने, छात्र समर्थन की कमी, उच्च ट्यूशन फीस वसूलने और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के बारे में चिंताओं पर जोर दिया।


मिलर ने कहा, 'यह अस्वीकार्य है कि कुछ निजी संस्थानों ने कम संसाधनों वाले परिसरों का संचालन करके, छात्रों के लिए समर्थन की कमी और उच्च ट्यूशन फीस वसूल कर अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लाभ उठाया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।' सीबीसी के अनुसार, सीमा के अलावा, संघीय सरकार को अंतरराष्ट्रीय छात्रों को परमिट के लिए आवेदन करते समय एक प्रांत या क्षेत्र से एक सत्यापन पत्र प्रदान करने की आवश्यकता होगी।

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