ड्रैगन की चाल: रिपोर्ट में खुलासा, चीन की प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियां फैल गई हैं सारे दक्षिण-पूर्व एशिया में
सी4एडीएस के मुताबिक चीनी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों से सेवा लेने का चलन दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में 2013 के बाद से बढ़ा है। 2019 और 2020 में इसमें तेजी से इजाफा हुआ। चीन की महत्वाकांक्षी इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण परियोजना- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत भी 2013 में ही हुई थी...
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दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में चीन की प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियों की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज (सी4एडीएस) की एक अध्ययन रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक उन देशों में चीन का निवेश बढ़ने के साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए चीनी सिक्योरिटी कंपनियों के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है। मसलन, सी4एडीएस के अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कंबोडिया और म्यांमार में जो 49 विदेशी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियां सुरक्षा मुहैया करा रही हैं, उनमें 29 चीन की हैं। मलेशिया में भी चीनी कंपनियों की उपस्थिति तेजी से बढ़ी है।
सी4एडीएस के मुताबिक चीनी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों से सेवा लेने का चलन दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में 2013 के बाद से बढ़ा है। 2019 और 2020 में इसमें तेजी से इजाफा हुआ। गौरतलब है कि चीन की महत्वाकांक्षी इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण परियोजना- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत 2013 में ही हुई थी। ये परियोजना शुरू होने के बाद दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में चीनी कंपनियों के निवेश में भारी इजाफा हुआ।
सी4एडीएस की रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसियों की तरह चीन की एजेंसियां भी अपने ग्राहकों को कई तरह की सेवाएं मुहैया कराती हैं। अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उन हिस्सों में भी इन एजेंसियों ने जाना स्वीकार किया है, जिन्हें मोटे तौर पर खतरनाक माना जाता है। रिपोर्ट में कंडोबिया स्थित पूर्व चीनी राजदूत के इस कथन का हवाला दिया है कि चीन को विदेशों में अपने निवेश की सुरक्षा व्यवस्था खुद इसलिए करनी पड़ती है, क्योंकि वह अमेरिका की तरह जब चाहे, अपने नौसैनिक वहां नहीं भेज सकता।
सी4एडीएस की रिपोर्ट तैयार करने वाले अनुसंधानकर्ताओं में एक बेन स्पेवैक ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए चीनी कंपनियां कई घटनाओं की वजह से प्रेरित हुईं। स्पवैक ने ध्यान दिलाया कि चीन ने कई ऐसे इलाकों में भारी निवेश किया है, जिन्हें खतरनाक समझा जाता है। उन्होंने कहा- ‘इसी को चीनी कंपनियां अपने देश की प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी की सेवा लेने के लिए अपना तर्क बनाती हैं। ये एजेंसियां कानून के दायरे में काम करती हैं। इस तरह वे अपनी सेवा की बिक्री कर रही होती हैं।’
सी4एडीएस ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि जो देश बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा बने हैं, उनके लिए क्या जोखिम पैदा हुआ है। उसने कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम के बारे में बताया है कि वहां स्पेशल इकॉनमिक जोन (एसईजेड) कैसे निर्मित हुए और उनकी वजह से उन देशों की सरकारों के लिए कैसे खतरे पैदा हो सकते हैं। स्पेवैक ने कहा कि एसईजेड आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के मकसद से बनाए गए हैं, लेकिन हमेशा असल में ऐसा होता नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि उन क्षेत्रों में आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन कुछ ऐसे नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिले हैं, जिनसे लाभ नुकसान में बदल जाते हैं। वहां कई तरह की गैर कानूनी गतिविधियां देखने को मिली हैं। साथ ही चीन के भू-राजनीतिक उद्देश्यों से भी वे क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। मसलन, लाओस में बने एक एसईजेड में देखा गया कि वहां आसपास बच्चों की तस्करी बढ़ गई और नशीली दवाओं का कारोबार भी शुरू हो गया।