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Bullet Train to Moon: जापान चलाएगा धरती से चंद्रमा तक बुलेट ट्रेन, इस महाप्रोजेक्ट पर भी कर रहा काम
Fri, 15 Jul 2022 03:52 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 15 Jul 2022 03:52 PM IST
सार
जापान मंगल पर एक ऐसा आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट बनाएगा, जिसका वातावरण पृथ्वी जैसा बनाया जाएगा, ताकि इंसान वहां रह सके और उसपर मंगल के वातावरण का कोई प्रभाव ना पड़े।
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जापानी बुलेट ट्रेन
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विस्तार
अभी तक आपने चंद्रयान और मंगलयान के बारे में ही जाना था, लेकिन अब जल्द ही पृथ्वी से बुलेट ट्रेन में सवार होकर इंसान चंद्रमा और मंगल तक जा सकेगा। दरअसल, जापान एक महा प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसके तहत जापान धरती से चांद तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर काम कर रहा है। जापान की योजना पहले इस बुलेट ट्रेन को चंद्रमा तक ले जाने की है, उसकी ये योजना अगर सफल रहती है तो फिर इसे मंगल पर भी ले जाने की योजना है।
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इतना ही जापान एक और योजना बना रहा है। जापान मंगल ग्रह पर ग्लास हैबिटेट बनाने का भी विचार कर रहा है। मतलब यह कि जापान मंगल पर एक ऐसा आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट बनाएगा, जिसका वातावरण पृथ्वी जैसा बनाया जाएगा, ताकि इंसान वहां रह सके और उसपर मंगल के वातावरण का कोई प्रभाव ना पड़े। दरअसल, कम गुरुत्वाकर्षण वाले स्थानों पर इंसानों की मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
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इस प्रोजेक्ट को जापान के क्योटो विश्वविद्यालय और निर्माण फर्म काजिमा कॉर्पोरेशन ने तैयार किया है। क्योटो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेस बुलेट ट्रेन के लिए हेक्सागोन स्पेस ट्रैक सिस्टम' नामक प्रणाली तैयार की जाएगी। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि इंटरप्लेनेटरी स्पेस ट्रेन पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल के बीच यात्रा करते समय अपना गुरुत्वाकर्षण पैदा करेगी।
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वहीं, आर्टिफिशियल स्पेस हैबिटेट के प्रोजेक्ट को जापानी शोधकर्ताओं ने द ग्लास नाम दिया है। इसके तहत जापानी वैज्ञानिकों ने चांद पर एक 1,300 फीट की संरचना बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे अंतिम रूप तक पहुंचने में 100 साल लगेंगे।
गौरतलब है कि नासा इस दशक के अंत में मनुष्यों को चंद्रमा पर वापस लाने की योजना बना रहा है। इसके अलावा चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में जापान के इस महाप्रोजेक्ट की घोषणा के बाद अंतरिक्ष को लेकर एक नई दौड़ शुरू हो सकती है।