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हंगरी चुनाव: प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के खिलाफ गोलबंदी पर पूरे यूरोप की नजर

Sun, 16 May 2021 03:23 PM IST
प्रियंका तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, बुडापेस्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, बुडापेस्ट Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sun, 16 May 2021 03:23 PM IST
सार

हंगरी पर लगा लोकतंत्र के दमन का आरोप। अगले चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के खिलाफ खड़े होंगे बुडापेस्ट के मेयर ग्रेगली काराक्सोनी।

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Budapest Mayor Gergely Karacsony will fight for the post of Prime Minister in next years election in Hungary
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हंगरी बीते कई वर्षों से यूरोपीय संघ (ईयू) के लिए चिंता का कारण बना रहा है। इसकी वजह ये इल्जाम है कि हंगरी में लोकतंत्र का दमन हो रहा है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष का दमन करने के आरोप लगे हैं। इसके खिलाफ वहां कोई पहल कर पाने में नाकाम रहने के कारण लोकतंत्र के प्रति ईयू की निष्ठा पर भी सवाल उठे हैं। इसलिए ईयू और बाकी दुनिया की भी अगले साल हंगरी में होने वाले चुनाव पर खास नजर है। ऐसे में जब राजधानी बुडापेस्ट के मेयर ग्रेगली काराक्सोनी ने शनिवार को अगले चुनाव में ऑर्बन के खिलाफ मैदान में उतरने का एलान किया, तो उन्हें पूरे यूरोप के मीडिया में बड़ी अहमियत मिली है।

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काराक्सोनी ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि वे ऑर्बन के खिलाफ उम्मीदवार बनने के लिए होने वाले चुनाव में भाग लेंगे। ऑर्बन विरोधी छह पार्टियों के गठबंधन में प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। काराक्सोनी ने कहा, ‘मैंने ये फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि मैं महसूस करता हूं कि मेरा देश मुश्किल में है।’ उन्होंने कहा कि उनकी राय में देश की सबसे बड़ी समस्या देश के नागरिकों का ध्रुवीकरण है। उन्होंने कहा, ‘मैं देश को फिर से एकताबद्ध करने की कोशिश करूंगा।’
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अगले चुनाव में ऑर्बन की फिडस्ज पार्टी को तगड़ी चुनौती मिलेगी
45 साल के काराक्सोनी 2019 से बुडापेस्ट के मेयर हैं। इस पद के लिए तब हुए चुनाव में वे छह पार्टियों के गठबंधन के उम्मीदवार थे। तब उनकी जीत को अहम माना गया था। ऑर्बन की धुर दक्षिणपंथी फिडस्ज पार्टी 2010 से सत्ता में है। तब से हुए संसदीय चुनावों में उसे दो तिहाई बहुमत मिलता रहा है। इससे विपक्ष का मनोबल गिरा है। इसके बीच राजधानी के मेयर पद के चुनाव में मिली सफलता से विपक्षी गठबंधन में नई जान आई थी। 2019 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कई दूसरे शहरों में भी छह पार्टियों के गठबंधन को कामयाबी मिली थी। अब ये पार्टियां गठबंधन का प्रयोग राष्ट्रीय चुनाव में भी दोहराना चाहती हैं। उम्मीद की गई है कि इससे अगले चुनाव में ऑर्बन की फिडस्ज पार्टी को तगड़ी चुनौती मिलेगी।
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ऑर्बन का एजेंडा
विपक्षी गठबंधन में सोशलिस्ट, ग्रीन और मध्यमार्गी उदारवादी पार्टियां शामिल हैं। उनके अलावा उसमें दक्षिणपंथी जॉबिक पार्टी भी शामिल हुई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि जॉबिक पार्टी अपने पुराने कट्टर यहूदी विरोधी रुख को नरम करते हुए अब धीरे-धीरे मध्यमार्ग की तरफ खिसकी है। ऑर्बन विरोधियों का आरोप है कि उनकी सरकार ने मीडिया और न्यायिक स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया है। उसने एकतरफा ढंग से नया संविधान लागू किया और चुनाव कानूनों को बदल दिया है, लेकिन ऑर्बन का दावा है कि वे एक नया प्रयोग कर रहे हैं। इसे वे ‘अनुदार लोकतंत्र’ कहते हैं, जो ईसाई रूढ़िवाद पर आधारित है। उनका एजेंडा आव्रजकों को हंगरी आने से रोकना है।

हंगरी में पिछला आम चुनाव 2018 में हुआ था। उसकी निगरानी के लिए आए कॉन्फ्रेंस ऑन सिक्योरिटी एंड को-ऑपरेशन (ओएससीई) के पर्यवेक्षकों ने कहा था कि मतदाताओं को डराने-धमकाने, विदेशी द्वेष की भावना भड़काने, मीडिया के पक्षपातपूर्ण व्यवहार और संदिग्ध राजनीतिक चंदे के कारण चुनाव निष्पक्ष नहीं रह गया। इसके बावजूद इस संगठन ने कहा था कि मतदाताओं ने स्वतंत्रता से मतदान किया।


विपक्षी दलों के पास एकजुट होने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं
विपक्षी दलों का कहना है कि फिडस्ज पार्टी की सरकार ने जिस तरह चुनाव नियमों को बदला है, उसके बाद उसका मुकाबला करने के लिए उनके पास एकजुट होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। ये रणनीति फिलहाल असरदार होती दिख रही है। हाल के जनमत सर्वेक्षणों में फिडस्ज और विपक्षी गठबंधन के बीच अगले चुनाव में कांटे का मुकाबला होने की संभावना जताई गई है। काराक्सोनी ने शनिवार को डाले अपने फेसबुक पोस्ट में फिडस्ज पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि वे देश की 99 फीसदी जनता के हित में काम करेंगे। यह एक वामपंथी नारा है। इसलिए अनुमान लगाया है कि एक धुर दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री को विपक्ष अगले चुनाव में वामपंथी एजेंडे के साथ चुनौती देगा।

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