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Polar Chandi: अंटार्कटिका की दूसरी यात्रा अकेले पूरा करेंगी हरप्रीत चंडी, पहले भी बना चुकीं ये रिकॉर्ड

Sat, 15 Oct 2022 03:54 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 15 Oct 2022 03:54 PM IST
सार

33 वर्षीय सिख सेना अधिकारी के सामने नई चुनौती यह होगी कि उन्हें अपनी किट के सहारे अत्यंत ठंठे इलाके यानी बर्फीले इलाके में कम तापमान के साथ गुजरना होगा। 

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British Sikh Polar Preet set for new record trek to Antarctica
हरप्रीत चंडी - फोटो : फेसबुक/आर्मी मेडिकल मेडिकल सर्विसेज, यूके

विस्तार

ब्रिटिश सेना में भारतीय मूल की सिख अधिकारी और फिजियोथेरेपिस्ट कैप्टन हरप्रीत चंडी अब अंटार्कटिका की दूसरी चुनौती के लिए तैयार हैं। इससे पहले उन्होंने अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव (साउथ पोल) के दुर्गम मार्ग की अकेले यात्रा पूरी कर रिकॉर्ड  बनाया था और ऐसा करने वाली वह भारतीय मूल की पहली महिला बनीं थीं।  

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पहले चरण में दक्षिणी ध्रुव की यात्रा की थी
कैप्टन हरप्रीत चंडी जनवरी में दक्षिणी ध्रुव से वापस लौटीं। उन्होंने पहले चरण में बिना किसी मदद के दक्षिणी ध्रुव के लिए अकेले एक हजार मील से ज्यादा की यात्रा पूरी की थी। तबसे उन्हें 'पोलर चंडी' के रूप में भी जाना जाता है।
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एशियन अचीवर्स अवॉर्ड से हो चुकीं सम्मानित
33 वर्षीय सिख सेना अधिकारी के सामने नई चुनौती यह होगी कि उन्हें अपनी किट के सहारे अत्यंत ठंठे इलाके यानी बर्फीले इलाके में कम तापमान के साथ गुजरना होगा। चंडी को हाल ही में लंदन में 'यूनिफॉर्म्ड एंड सिविल सर्विस' कैटगरी में 'एशियन अचीवर्स अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया था। 
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अभियान को लेकर कैप्टन हरप्रीत चंडी ने क्या कहा?
चंडी कहती हैं, मेरा लक्ष्य अंटार्कटिका की अकेले और बिना मदद के यात्रा पूरा करना है। इसमें मुझे एक हजार मील से ज्यादा की यात्रा करनी होगी। माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान और 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवा का सामना करना है। इस यात्रा करीब 75 दिन लगेंगे। उन्होंने आगे कहा, यह अभियान मुझे अंटार्कटिका महाद्वीप में अकेले और बिना मदद की यात्रा पूरी करने वाली पहली महिला बना देगा। 


तीन साल पहले किया था महाद्वीप पार करने का फैसला
तीन साल पहले जब वह अंटार्कटिका के बारे में जान रही थी, तभी उन्होंने इस महाद्वीप को पार करने का फैसला कर लिया था। हालांकि तब उन्होंने 'अंटार्कटिका लॉजिस्टिक एंड एक्सपीडिशंस' (एएलई) के लिए अपना आवेदन नहीं दिया था। एएलई इस तरह के अभियानों के लिए अनुमति देता है। 

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