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तालिबान का एक और फरमान: अफगानिस्तान में लड़के-लड़कियों को एक कक्षा में नहीं बैठाया जाएगा

Mon, 13 Sep 2021 01:47 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, काबुल।
एजेंसी, काबुल। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 13 Sep 2021 01:47 AM IST
सार

1996 में बनाई अफगान सरकार के मुकाबले इस बार आतंकियों ने अपनी नीतियां अलग रखने की बात कही है। उस समय किसी लड़की को शिक्षा या सार्वजनिक जीवन में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं था।

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boys and girls will not sit in one classroom in afghanistan
तालिबान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

विस्तार

अपनी सरकार की घोषणा कर चुके तालिबानी आतंकियों ने घोषणा की है कि अफगानिस्तान में लड़कियों को विश्वविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर पढ़ने देगा। हालांकि इस दौरान लड़कों और लड़कियों को अलग अलग क्लासरूम में बैठाया जाएगा। साथ ही लड़कियों को इस्लामी वस्त्रों में आना होगा।

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2012 की यूरोपीय आतंकी सूची में शामिल रहे तालिबानी शिक्षा मंत्री अब्दुल बाकी हक्कानी ने एक प्रेस वार्ता में इन नीतियों का खुलासा किया। हक्कानी ने कहा कि पढ़ने आ रही लड़कियों के लिए हिजाब अनिवार्य होगा।
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हालांकि यह नहीं बताया कि क्या उन्हें पूरा चेहरा ढंकना होगा। दूसरी ओर लड़के-लड़कियों की अलग-अलग कक्षाओं में बैठाने का नियम सख्ती से पालन करने के लिए कहा है।
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हालांकि इस बार भी सरकार में महिलाओं को शामिल नहीं किया गया। भले ही तालिबान खुद को महिलाओं के प्रति बदले हुए दृष्टिकोण का बता रहा है, लेकिन बीते दिनों में उसने महिला प्रदर्शनकारियों को क्रूरता से रोका है।

हक्कानी ने कहा कि तालिबान 20 साल पीछे नहीं जाना जाता, आज जो है, उसी से वह देश को बनाएगा। तीन दिन पहले हक्कानी ने पीएचडी या मास्टर्स डिग्री को आज के समय में अनुपयोगी बताते हुए धार्मिक पवित्रता को महत्वपूर्ण बताया था।

क्या पढ़ाया जा रहा, इस पर नजर रखेगा
तालिबान ने कहा कि कक्षाओं में क्या पढ़ाया जाए, इस बारे में अभी वह विस्तृत निर्देश नहीं दे रहा है, लेकिन विश्वविद्यालयों के कोर्स व पाठ्यक्रम पर नजर रखेगा। इनका मूल्यांकन भी करवाएगा। हाल में कट्टर इस्लाम का पालन करवाने के नाम पर तालिबान ने संगीत और विभिन्न कलाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।


लड़कियों को शिक्षिकाएं ही पढ़ाएंगी
हक्कानी ने कहा कि जहां तक संभव होगा लड़कियों को पढ़ाने का काम शिक्षिकाएं ही करेंगी। उसने अल्लाह को शुक्रिया कहा कि अफगानिस्तान के पास बड़ी संख्या में शिक्षिकाएं हैं, इससे अपनी नीति लागू करने में उसे दिक्कत नहीं होगी। खुद सरकार भी प्रयास करेगी कि लड़कियों को शिक्षिकाएं ही पढ़ाएं। फिर भी संभव न हुआ तो पुरुष शिक्षक लड़कियों को पढ़ा सकेंगे, लेकिन इस समय शरिया का पूरा पालन करना होगा। संभव हो तो ऐसा ऑनलाइन माध्यम से भी करवाया जा सकता है। हालांकि क्या शिक्षिकाएं लड़कों को पढ़ा सकती हैं, इस बारे में उसने कोई बात नहीं की।

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