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धरती के अंदर 660 किमी पर दबे हैं दुर्लभ ब्लू डायमंड- खोज
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 03 Aug 2018 06:35 AM IST
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दुर्लभ ब्लू डायमंड (सांकेतिक चित्र)।
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दुर्लभ ब्लू डायमंड (द होप डायमंड) दुनिया के अन्य रत्नों की तुलना में पृथ्वी के लगभग 410 मील नीचे धंसा हुआ है। हाल में ब्लू डायमंड का पता लगाने के लिए एक वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की है। रिसर्च के मुताबिक, ये दुर्लभ हीरे धरती के अंदर 660 किमी (410 मील) की गहराई पर पाए जाते हैं। यानी यह पृथ्वी के लोअर मेंटल तक पाए जाते हैं। इसे ही ब्लू डायमंड (नीला हीरा) की उत्पत्ति का मूल स्थल माना जा रहा है।
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‘नेचर जर्नल’ में प्रकाशित इस रिसर्च की अगुआई जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका के वैज्ञानिक इवान स्मिथ ने की है। उन्होंने कहा कि ये पहली बार है कि जब तथ्यों के साथ ब्लू डायमंड की उत्पत्ति के बारे में पहली बार प्रकाश डाला गया है। इससे पहले किसी को नहीं पता था, कि ये कैसे बने हैं।
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उल्लेखनीय है कि 99 प्रतिशत हीरे पृथ्वी के भीतर 150-200 किमी (90-125 मील) की गहराई तक ही पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने 46 ब्लू डायमंड का अध्ययन करने के बाद ये निष्कर्ष निकाला है। कुल खोजे गए हीरों में ब्लू डायमंड (नीला हीरा) की हिस्सेदारी 0.02 प्रतिशत ही है लेकिन ये दुनिया के सबसे मशहूर हीरों में शुमार हैं। डायमंड शुद्ध कार्बन का क्रिस्टेलाइन रूप है। बेहद ऊष्मा और दबाव के चलते इनका निर्माण होता है।
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