कौन है जिम्मेदार: अफगान नाकामी का दोष एक-दूसरे माथे मढ़ रहे हैं बाइडन प्रशासन के विभाग
राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को अफगानिस्तान की घटनाओं पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। इसमें उन्होंने तालिबान की जीत के लिए अफगान सुरक्षा बलों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि इन बलों ने तालिबान से लड़ने का कोई इरादा नहीं दिखाया...
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अफगानिस्तान में नाकामी के लिए बाइडन प्रशासन के विभिन्न विभागों के बीच एक दूसरे को दोषी ठहराने का सिलसिला चल रहा है। सबसे पहला सवाल यह पूछा गया है कि बाइडन प्रशासन ने समय रहते उन अफगान नागरिकों को अफगानिस्तान से बाहर क्यों नहीं निकाला, जिन्होंने दो दशक तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका की मदद की थी। ऐसा करने का ही नतीजा हुआ कि सोमवार को काबुल हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी मची और खतरनाक हालात पैदा हुए।
टीवी चैनल सीएनएन की एक खबर के मुताबिक सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे कई हफ्तों से विदेश मंत्रालय से आग्रह कर रहे थे कि अफगानिस्तान से अपने लोगों को जल्द से जल्द निकाला जाए। जबकि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वे खुफिया एजेंसियों से मिले आकलन के आधार पर चल रहे थे। इन अधिकारियों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने कहा था कि अफगानिस्तान से लोगों को निकालने के लिए पर्याप्त समय है। उधर खुफिया अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बहुत पहले तालिबान के तेजी से आगे बढ़ते हुए काबुल पर कब्जा कर लेने की आशंका से प्रशासन को आगाह कर दिया था।
सीएनएन के मुताबिक उसे एक खुफिया सूत्र ने बताया कि खुफिया एजेंसियों ने पिछले महीने ही अपना आकलन सरकार को भेजा था। उसमें यह बताया गया था कि दोहा वार्ता में शामिल रहने के बावजूद तालिबान अफगानिस्तान पर पूरी सैनिक विजय की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन प्रशासन के अधिकारियों को भरोसा दोहा में चल रही वार्ता पर बना रहा।
राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को अफगानिस्तान की घटनाओं पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। इसमें उन्होंने तालिबान की जीत के लिए अफगान सुरक्षा बलों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि इन बलों ने तालिबान से लड़ने का कोई इरादा नहीं दिखाया। बाइडन ने ये माना कि तालिबान ने उनके अनुमान से काफी पहले काबुल पर कब्जा कर लिया।
अब कुछ अधिकारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा गया है कि राष्ट्रपति को उनके टॉप सैनिक और खुफिया सलाहकारों से गलत सलाह मिली। उन अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिकी सेनाओं के ज्वाइंट चीफ जनरल माइक मिले ने तीन हफ्ते पहले कहा था कि अफगान सेना तालिबान से लड़ने और अपने देश की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा था कि यह मान कर चलना गलत है कि तालिबान कब्जा कर ही लेगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि रक्षा मंत्रालय ने तालिबान की लगातार हो रही बढ़त को देखते हुए योजना बनाई थी। लेकिन उन्होंने इस सवाल पर कुछ कहने से इनकार कर दिया कि क्या उस योजना के बारे मे राष्ट्रपति को बताया गया था। किर्बी ने कहा- ‘जिस एक बात का अनुमान हम नहीं लगा पाए, वह यह था कि अफगान बल बिना लड़े पूरा समर्पण कर देंगे।’
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने अमेरिकी मीडिया को बताया है कि हाल के हफ्तों में मंत्रालय के भीतर अफगान रणनीति को लेकर गहरे मतभेद थे। उन्होंने पुष्टि की है कि सेना तुरंत काबुल दूतावास बंद करने की सलाह दी थी, लेकिन मंत्रालय के अधिकारियों ने उसे स्वीकार नहीं किया। लेकिन इन सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने यह नहीं कहा था कि काबुल पर तालिबान का कब्जा निश्चित है। इसलिए मंत्रालय ने आपात स्थिति की कल्पना नहीं की।