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UN: भारत-जापान के UNSC में स्थायी सीट के पक्ष में आया भूटान; PM तोबगे ने बताया योग्य राष्ट्र, सुधार की कही बात
Sat, 27 Sep 2025 02:05 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 27 Sep 2025 02:05 PM IST
सार
भूटान के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की 100वीं वर्षगांठ की ओर देखते हुए एक सकारात्मक भविष्य की कल्पना पेश की। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसा स्थान बनाना होगा, 'जहां शांति सामान्य बात हो, जलवायु स्थिर रहे, और हर बच्चा चाहे वह कहीं भी जन्मा हो, एक उत्पादक और सुरक्षित जीवन जीने का अवसर पा सके।'
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री तोबगे
- फोटो : X @tsheringtobgay
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विस्तार
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में विश्व समुदाय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में बड़े सुधार की मांग की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सुरक्षा परिषद में भारत और जापान जैसे योग्य देशों को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए, ताकि आज की वैश्विक परिस्थितियों और जटिल चुनौतियों को सही तरीके से दर्शाया जा सके।
यह भी पढ़ें - G4 FM Meet: जी-4 देशों ने यूएनएससी में सुधार की दोहराई मांग, विकासशील देशों की बड़ी भागीदारी पर भी दिया जोर
'स्थायी और अस्थायी सदस्यता का विस्तार जरूरी'
भूटान के पीएम तोबगे ने कहा कि दुनिया आज कई गंभीर संकटों से जूझ रही है, जिनमें जलवायु संकट, गरीबी और लगातार बढ़ते संघर्ष शामिल हैं। ऐसे हालात में एक मजबूत, प्रतिनिधिक और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है, जो केवल प्रस्ताव पास करने तक सीमित न रहकर ठोस नतीजे दे। उन्होंने कहा, 'भूटान संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन करता है, जिसमें सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सदस्यता का विस्तार शामिल है। एक सुधारित सुरक्षा परिषद में भारत और जापान जैसे योग्य और सक्षम देशों के साथ अन्य अग्रणी देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आज की जटिल वास्तविकताओं को सही तरीके से प्रतिबिंबित किया जा सके।'
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भारत के लिए समर्थन का संकेत
भूटान के प्रधानमंत्री का यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थायी सदस्यता की मांग को सीधा समर्थन देता है। भारत एशिया का एक प्रमुख लोकतांत्रिक देश है और वैश्विक मुद्दों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। पीएम तोबगे का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में ब्रिक्स समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भारत और ब्राजील के लिए सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की मांग की गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की थी।
ब्रिक्स की बैठक के संयुक्त बयान में कहा गया था, 'हम सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और कुशल बनाने के लिए व्यापक सुधार की मांग दोहराते हैं। हम ब्राजील और भारत की संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षा का समर्थन करते हैं।' चीन और रूस, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, उन्होंने भी भारत और ब्राजील के समर्थन को दोहराया।
UN80 पहल पर जोर
पीएम तोबगे ने महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की यूएन के 80वें पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी नैतिक साख और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करे। उन्होंने कहा, 'हमें नवीनीकृत उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना होगा। ऐसा उद्देश्य जो शांति, सतत विकास और जलवायु कार्रवाई पर निर्णायक कदम उठाने की क्षमता को मजबूत करे। ऐसा उद्देश्य जो संयुक्त राष्ट्र को हमारे सामूहिक भविष्य के लिए उपयोगी बनाए।'
यह भी पढ़ें - UNGA: न्यूयॉर्क में अवामी लीग समर्थकों का प्रदर्शन, मोहम्मद यूनुस को बताया अवैध शासक, पाकिस्तान जाने की नसीहत
भारत की लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग
वर्तमान में यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य हैं; अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इन पांच देशों को वीटो पावर प्राप्त है। भारत और जापान के साथ-साथ जर्मनी और ब्राजील को भी लंबे समय से स्थायी सदस्यता के लिए प्रमुख दावेदार माना जाता रहा है। भूटान जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण देश का भारत के समर्थन में खुलकर सामने आना, यूएनएससी सुधार को लेकर बढ़ते वैश्विक दबाव का संकेत देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की राजनीति में और भी ज्यादा गर्मा सकता है।
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'स्थायी और अस्थायी सदस्यता का विस्तार जरूरी'
भूटान के पीएम तोबगे ने कहा कि दुनिया आज कई गंभीर संकटों से जूझ रही है, जिनमें जलवायु संकट, गरीबी और लगातार बढ़ते संघर्ष शामिल हैं। ऐसे हालात में एक मजबूत, प्रतिनिधिक और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है, जो केवल प्रस्ताव पास करने तक सीमित न रहकर ठोस नतीजे दे। उन्होंने कहा, 'भूटान संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन करता है, जिसमें सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों तरह की सदस्यता का विस्तार शामिल है। एक सुधारित सुरक्षा परिषद में भारत और जापान जैसे योग्य और सक्षम देशों के साथ अन्य अग्रणी देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आज की जटिल वास्तविकताओं को सही तरीके से प्रतिबिंबित किया जा सके।'
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भारत के लिए समर्थन का संकेत
भूटान के प्रधानमंत्री का यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थायी सदस्यता की मांग को सीधा समर्थन देता है। भारत एशिया का एक प्रमुख लोकतांत्रिक देश है और वैश्विक मुद्दों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है। पीएम तोबगे का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में ब्रिक्स समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भारत और ब्राजील के लिए सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की मांग की गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की थी।
ब्रिक्स की बैठक के संयुक्त बयान में कहा गया था, 'हम सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और कुशल बनाने के लिए व्यापक सुधार की मांग दोहराते हैं। हम ब्राजील और भारत की संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षा का समर्थन करते हैं।' चीन और रूस, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, उन्होंने भी भारत और ब्राजील के समर्थन को दोहराया।
UN80 पहल पर जोर
पीएम तोबगे ने महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की यूएन के 80वें पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी नैतिक साख और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करे। उन्होंने कहा, 'हमें नवीनीकृत उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना होगा। ऐसा उद्देश्य जो शांति, सतत विकास और जलवायु कार्रवाई पर निर्णायक कदम उठाने की क्षमता को मजबूत करे। ऐसा उद्देश्य जो संयुक्त राष्ट्र को हमारे सामूहिक भविष्य के लिए उपयोगी बनाए।'
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भारत की लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग
वर्तमान में यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य हैं; अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इन पांच देशों को वीटो पावर प्राप्त है। भारत और जापान के साथ-साथ जर्मनी और ब्राजील को भी लंबे समय से स्थायी सदस्यता के लिए प्रमुख दावेदार माना जाता रहा है। भूटान जैसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण देश का भारत के समर्थन में खुलकर सामने आना, यूएनएससी सुधार को लेकर बढ़ते वैश्विक दबाव का संकेत देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की राजनीति में और भी ज्यादा गर्मा सकता है।