फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh will educate rohingya refugee childrens with help of unicef

रोहिंग्या शरणार्थियों के लाखों बच्चों को औपचारिक शिक्षा देगा बांग्लादेश, यूनिसेफ करेगा मदद

Thu, 30 Jan 2020 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 30 Jan 2020 05:52 PM IST
विज्ञापन
Bangladesh will educate rohingya refugee childrens with help of unicef
Rohingya Refugees Childerns Cox's Bazar - फोटो : Social Media

बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चे बाकायदा औपचारिक शिक्षा हासिल कर सकेंगे। बांग्लादेश सरकार उनके लिए यूनिसेफ की मदद से म्यांमार और बांग्लादेश में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के मुताबिक एक साझा पाठ्यक्रम तैयार कर रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने इसे एक सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि हम नहीं चाहते कि रोहिंग्या शरणार्थियों की अगली पीढ़ी शिक्षा के बगैर भटकाव का शिकार रहे।

विज्ञापन


बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए बनाए गए राष्ट्रीय टास्कफोर्स की बैठक में लिए गए इस अहम फैसले के बाद अब इस दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके तहत शुरुआती दौर में यूनिसेफ और बांग्लादेश सरकार मिलकर 10 हजार रोहिंग्या बच्चों के लिए एक ऐसा पाठ्यक्रम बनाने में लगी हैं, जिसमें 14 साल तक के बच्चों को म्यांमार के इतिहास और संस्कृति के बारे में पढ़ाया जाए। इसके बाद उन्हें किसी हुनर का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वह आने वाले दिनों में जब वो अपने देश म्यांमार लौटें तो उन्हें वहां नौकरी के मौके मिल सकें।        
विज्ञापन


गौरतलब है कि 2017 में म्यांमार के बर्बर सैन्य अभियान से आतंकित होकर लाखों रोहिंग्या लोगों ने म्यामार से लगी बांग्लादेश की सीमा में अस्थाई कैंपों में शरण ले रखी है। ऐसे करीब 10 लाख शरणार्थी वहां बहुत ही बुरी हालत में रह रहे हैं। इनमें करीब पांच लाख बच्चे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


युवा रोहिंग्या नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता रफीक बिन हबीब ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा है कि म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लोगों के लिए शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है और वहां उनके साथ बेहद अमानवीय व्यवहार होता रहा है। इस फैसले से रोहिंग्या बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी है, साथ ही इससे उनके भीतर भर गई उपेक्षा की भावना से उन्हें निकाला जा सकेगा।

बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि मिया सेप्पो ने कहा है कि इससे रोहिंग्या समुदाय के लोगों की म्यांमार वापसी के रास्ते भी खुलेंगे। एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े दक्षिण एशिया के प्रतिनिधि साद हम्मादी ने भी इस फैसले के लिए बांग्लादेश सरकार की तारीफ की है और कहा है कि इससे बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने पूरे हो सकेंगे। ये बच्चे पहले ही अपने दो सत्र की पढ़ाई में पिछड़ चुके हैं।


ढाका के कॉक्स बाजार में रहने वाले तमाम बच्चों को इस स्तरीय शिक्षा की पहल से फायदा होगा। बांग्लादेश को इस मुहिम में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मदद मिल रही है। दूसरी तरफ करीब 10 हजार रोहिंग्या मुसलमानों के बच्चों को इस्लामी संगठनों की तरफ से भी मदरसों में शिक्षा दी जा रही है। करीब एक हफ्ते पहले अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) ने भी रोहिंग्या समुदाय के लोगों की हर मदद करने, उनके खिलाफ जुल्म रोकने और उनकी ज़मीनी हालत सुधारने के लिए म्यांमार सरकार को आदेश दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed