Bangladesh: विपक्ष और विरोध की हर आवाज को दबा देना चाहती है बांग्लादेश सरकार?
Bangladesh: मीडिया संगठनों का काफी समय से यह आरोप रहा है कि शेख हसीना आलोचना को लेकर असहनशील हो गई हैं और उनकी सरकार हर विरोधी आवाज को बंद कर देने की कोशिश में है। ताजा गाज विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अखबार दैनिक दिनकाल पर गिरी है...
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बांग्लादेश में मुख्य विपक्षी दल के एकमात्र अखबार को बंद करवा देने के सरकार के फैसले के बाद इस आरोप को बल मिला है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद देश में तानाशाही कायम होने की तरफ बढ़ रही हैं। खास कर इससे प्रेस की आजादी पर खतरा बढ़ने की आशंका फैल गई है।
मीडिया संगठनों का काफी समय से यह आरोप रहा है कि शेख हसीना आलोचना को लेकर असहनशील हो गई हैं और उनकी सरकार हर विरोधी आवाज को बंद कर देने की कोशिश में है। ताजा गाज विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अखबार दैनिक दिनकाल पर गिरी है। यह तीन दशक पुराना अखबार है, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं। यह अखबार वैसी खबरें प्रकाशित करता था, जिसे छापने से मेनस्ट्रीम के अखबार आम तौर पर बचते हैँ। आरोप है कि मेनस्ट्रीम के ज्यादातर अखबारों के मालिक सरकार समर्थक कारोबारी हैं, जो सरकार विरोधी खबरों को नहीं छपने देते हैं।
बीएनपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की घटनाएं हाल में काफी बढ़ गई हैं। हजारों कार्यकर्ताओं और बीएनपी समर्थकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए हैं। बीएनपी का आरोप है कि ये फर्जी मुकदमे हैं। इसी बीच अब दैनिक दिनकाल को बंद कराने का फैसला सामने आया है। अखबार के मुताबिक ढाका के जिला अधिकारियों ने बीते 26 दिसंबर को अखबार प्रकाशन बंद करने को कहा था। तब अखबार ने प्रेस काउंसिल के पास शिकायत दर्ज कराई और प्रकाशन जारी रखा। अखबार के मैनेजिंग एडिटर शिमुल बिस्वास ने एक समाचार एजेंसी को बताया- ‘प्रेस काउंसिल ने रविवार को हमारी अपील खारिज कर दी और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को वैध ठहरा दिया।’
जिला मजिस्ट्रेट ने आरोप लगाया था कि अखबार ने प्रकाशन और मुद्रण नियमों का उल्लंघन किया है। प्रेस काउंसिल ने अपने निर्णय में कहा कि अखबार के प्रकाशक तारिक रहमान एक सजायाफ्ता मुजरिम हैं, जो बिना अपना पद किसी और को सौंपे विदेश में रहने चले गए हैं। जबकि बिस्वास ने एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी को बताया कि लंदन में रह रहे रहमान अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं और एक नए प्रकाशक की नियुक्ति हो चुकी है। लेकिन अधिकारियों ने इस बदलाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा- अखबार बंद करवाने का यह फैसला असहमत आवाजों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का हिस्सा है। ढाका स्थित पत्रकार संगठनों ने भी इस फैसले को विपक्षी आवाजों को दबाने की बढ़ती प्रवृत्ति का सबूत बताया है। इन संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ सोमवार को विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।
इसके पहले पिछले महीने शेख हसीना सरकार ने 191 वेबसाइटों को बंद करवा दिया था। उन वेबसाइटों पर ‘देश विरोधी खबरें’ छापने का आरोप लगाया गया था। इसके पहले भी सरकार वेबसाइटों को बंद करवाती रही है। दिसंबर 2018 में हुए आम चुनाव से ठीक पहले कई वेबसाइटों को बंद करवा दिया गया था। सरकार के इस रवैये के कारण प्रेस स्वतंत्रता के सूचकांकों पर बांग्लादेश का दर्जा गिरता चला गया है। 2022 में रिपोर्ट्स विदाउट बॉर्डर्स के इंडेक्स पर बांग्लादेश 162वें नंबर पर था, जबकि अफगानिस्तान 156वें नबंर आया था।