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Bangladesh: बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की विरासत मिटाने की तैयारी, पाठ्यपुस्तकों में किया गया बड़ा बदलाव
Thu, 02 Jan 2025 02:26 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 02 Jan 2025 02:26 PM IST
सार
2025 शैक्षणिक वर्ष के लिए नई पाठ्यपुस्तकों में बताया जाएगा कि '26 मार्च, 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की आजादी का एलान किया था और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता की एक और घोषणा की।'
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शेख मुजीब उर रहमान
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बांग्लादेश में सिलसिलेवार तरीके से शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश हो रही है और अब इसी कोशिश के तहत बांग्लादेश की पाठ्य पुस्तकों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के तहत बताया गया है कि साल 1971 में बांग्लादेश की आजादी की घोषणा पहली बार जिया उर रहमान ने की थी न कि शेख मुजीबुर रहमान ने। अभी तक बांग्लादेश की आजादी की घोषणा का श्रेय शेख मुजीबुर रहमान को दिया जाता था।
पाठ्यक्रम में किया गया ये बदलाव
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, नई पाठ्यपुस्तकों में कई बदलाव किए गए हैं, जिनमें शेख मुजीबुर रहमान को दी जाने वाली 'राष्ट्रपिता' की उपाधि भी हटा ली गई है। 2025 शैक्षणिक वर्ष के लिए नई पाठ्यपुस्तकों में बताया जाएगा कि '26 मार्च, 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की आजादी का एलान किया था और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता की एक और घोषणा की।' बांग्लादेशी मीडिया ने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम रेजुल हसन के हवाले से यह जानकारी दी है।
पाठ्यपुस्तकों में बदलाव की प्रक्रिया में शामिल रहे रिसर्चर राखल राहा ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों से अतिरंजित और थोपे गए इतिहास को हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 'पाठ्यपुस्तकों में बताया गया था कि शेख मुजीबुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने वायरलेस संदेश में बांग्लादेश की आजादी का एलान किया था, लेकिन ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिसके बाद ही इसे हटाने का फैसला किया गया है।' आवामी लीग के समर्थक मानते हैं कि शेख मुजीबुर रहमान ने देश की आजादी का एलान किया था और जियाउर रहमान ने, जो उस समय सेना में थे, मुजीब के निर्देश पर केवल घोषणा पढ़ी थी।
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बांग्लादेशी करेंसी से भी मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाने की तैयारी
बांग्लादेश के नोटों से शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। बीते साल 5 अगस्त को शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और उनके देश छोड़कर जाने के बाद से ही शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है। शेख मुजीबुर रहमान की हत्या वाली तारीख 15 अगस्त को मिलने वाले अवकाश को भी खत्म कर दिया गया है। गौरतलब है कि जिया उर रहमान की पत्नी खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने ही शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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पाठ्यक्रम में किया गया ये बदलाव
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, नई पाठ्यपुस्तकों में कई बदलाव किए गए हैं, जिनमें शेख मुजीबुर रहमान को दी जाने वाली 'राष्ट्रपिता' की उपाधि भी हटा ली गई है। 2025 शैक्षणिक वर्ष के लिए नई पाठ्यपुस्तकों में बताया जाएगा कि '26 मार्च, 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की आजादी का एलान किया था और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता की एक और घोषणा की।' बांग्लादेशी मीडिया ने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम रेजुल हसन के हवाले से यह जानकारी दी है।
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पाठ्यपुस्तकों में बदलाव की प्रक्रिया में शामिल रहे रिसर्चर राखल राहा ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों से अतिरंजित और थोपे गए इतिहास को हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 'पाठ्यपुस्तकों में बताया गया था कि शेख मुजीबुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने वायरलेस संदेश में बांग्लादेश की आजादी का एलान किया था, लेकिन ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिसके बाद ही इसे हटाने का फैसला किया गया है।' आवामी लीग के समर्थक मानते हैं कि शेख मुजीबुर रहमान ने देश की आजादी का एलान किया था और जियाउर रहमान ने, जो उस समय सेना में थे, मुजीब के निर्देश पर केवल घोषणा पढ़ी थी।
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बांग्लादेशी करेंसी से भी मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाने की तैयारी
बांग्लादेश के नोटों से शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। बीते साल 5 अगस्त को शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने और उनके देश छोड़कर जाने के बाद से ही शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है। शेख मुजीबुर रहमान की हत्या वाली तारीख 15 अगस्त को मिलने वाले अवकाश को भी खत्म कर दिया गया है। गौरतलब है कि जिया उर रहमान की पत्नी खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी ने ही शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाई थी।